Hisar: उत्तराखंड में सरसों उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, एचएयू की उन्नत किस्में पहुंचीं

हिसार: यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की जा रही उन्नत कृषि किस्मों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय ने सरसों की अपनी पहली हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 के बीज उत्पादन और विपणन के लिए उत्तराखंड की हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, रुद्रपुर के साथ गैर-अनन्य लाइसेंस समझौता किया है। इससे इस उन्नत किस्म का बीज बड़े स्तर पर तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाने का रास्ता साफ हो गया है। समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग तथा कंपनी की ओर से जोनल मैनेजर बीएन मिश्रा ने हस्ताक्षर किए।
कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने मंगलवार को बताया कि समझौते के तहत कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी और इसके बाद उसे आरएचएच 2101 के बीज का उत्पादन एवं विपणन करने का अधिकार मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय की विकसित तकनीक और उन्नत किस्म का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सकेगा।
142 दिन में तैयार, 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि आरएचएच 2101 सरसों की उन्नत हाइब्रिड किस्म है, जो करीब 142 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इस किस्म में शाखाओं की संख्या अधिक होने के साथ फलियों की संख्या भी ज्यादा होती है, जिससे इसकी उत्पादन क्षमता अन्य उन्नत किस्मों की तुलना में बेहतर रहती है। इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और इनमें करीब 40 प्रतिशत तेल अंश पाया जाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि निजी क्षेत्र के साथ इस तरह की साझेदारी से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई किस्मों और तकनीकों का व्यावसायिक स्तर पर विस्तार होगा तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।





