Hisar: रासायनिक खाद का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी के लिए घातक: प्रो. कंबोज

हिसार: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय सभागार में कृषि अधिकारी कार्यशाला (रबी) 2025 का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य अतिथि के तौर पर उद्घाटन किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा प्रदेश के कृषि और किसान कल्याण विभाग के सभी जिलों से कृषि अधिकारी भाग ले रहे हैं।कुलपति प्रो कम्बोज ने अपने संबोधन में साेमवार काे कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। आजादी के पश्चात् देश के खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई जिसका श्रेय देश के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और नीति निर्धारकों को जाता है। देश के नागरिकों के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा निरन्तर शोध कार्यों, उन्नत किस्मों के बीजों, नवीनतम तकनीकों, नवाचारों तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को अनाज उत्पादन में बढ़ोतरी एवं अपनी आय में वृद्धि करने के लिए परम्परागत फसलों के साथ-साथ तिलहनी एवं दलहनी फसलों को प्राथमिकता देनी होगी। कुलपति ने किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के लिए कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के बीच आपसी सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया है। उन्होंने फसल विविधीकरण एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का सीमित मात्रा में प्रयोग करने के साथ-साथ उपयुक्त फसल चक्र को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें जैव उर्वरकों की तरफ बढऩा होगा जोकि पौधों को प्राकृतिक तौर पर पोषक तत्व उपलब्ध करवा सकते हैं एवं भूमि की उर्वरा शक्ति को बनायें रखने में मदद करते हैं।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों को रबी सीजन के लिए गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों के उन्नत किस्मों के बीजों बारे में जागरूक करें ताकि किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकें। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई गेहूं की अत्याधिक पैदावार देने वाली डब्ल्यूएच 1270, डब्ल्यूएच 1402, डब्ल्यूएच 1309 तथा सरसों की आरएच 1975, आरएच 725, आरएच 1424 तथा आरएच 1706 के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने हकृवि के विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन भी किया।विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कार्यशाला की विस्तृत जानकारी देते हुए निदेशालय द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने अनुसंधान परियोजनाओं व विश्वविद्यालय की नवीनतम तकनीकों पर चल रहे शोध कार्यो के बारे में बताया।कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. आरएस सोलंकी ने सरकार द्वारा किसानों के कल्याणार्थ क्रियान्वित की जा रही योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावान्तर भरपाई योजना, मेरा पानी-मेरी विरासत, हर खेत स्वस्थ खेत, तथा मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को दी जा रही अनुदान योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने धन्यवाद किया। विस्तार शिक्षा निदेशालय के सह-निदेशक डॉ. सुनील ढांडा ने मंच का संचालन किया।
इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, विभागाध्यक्ष, कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।





