हरियाणा

Hisar: हिसार के वैज्ञानिकों ने बनाई देश की पहली थीलीरिया क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम

Admindelhi1
7 July 2026 9:09 AM IST
Hisar: हिसार के वैज्ञानिकों ने बनाई देश की पहली थीलीरिया क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम
x
पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में हिसार के वैज्ञानिकों का बड़ा नवाचार

हिसार: लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के वैज्ञानिकों ने पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ‘थीलीरिया क्लिनिकल निर्णय सहयोग प्रणाली’ विकसित की है। इस स्वदेशी डिजिटल प्रणाली को भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने 11 जून को आधिकारिक कॉपीराइट प्रदान किया है।

यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पशुओं में होने वाले थीलीरिया रोग के त्वरित, सटीक और साक्ष्य-आधारित निदान तथा उपचार संबंधी निर्णय लेने में पशु चिकित्सकों की प्रभावी सहायता करेगा। यह प्रणाली डॉ. रेमन मोर ने अपने एमवीएससी शोध कार्य के दौरान डॉ. अंकित कुमार के मार्गदर्शन में विकसित की है।

यह प्रणाली रोग की पहचान, उसकी गंभीरता का आकलन, उपचार योजना तैयार करने, रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की आवश्यकता का निर्धारण तथा वैज्ञानिक उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह ऑफलाइन कार्य करती है, जिससे इंटरनेट सुविधा के अभाव वाले ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय के अनुसार यह प्लेटफॉर्म पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पशुपालकों के लिए समान रूप से उपयोगी साबित होगा तथा डिजिटल पशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा।

इस उपलब्धि पर शोध दल ने सोमवार को कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। कुलपति ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह नवाचार विश्वविद्यालय की अनुसंधान संस्कृति, वैज्ञानिक सोच और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रणाली भविष्य में पशु चिकित्सकों के लिए एक प्रभावी निर्णय सहयोग उपकरण सिद्ध होगी और पशुपालकों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश खुराना ने भी शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट अनुसंधान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार न केवल पशु चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे, बल्कि देश में डिजिटल पशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी सशक्त बनाएंगे।

इस तकनीक के विकास में डॉ. रेमन मोर, डॉ. अंकित कुमार, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. नीलेश सिंधु, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. सुखदीप वोहरा, डॉ. बिस्वा रंजन महाराणा तथा डॉ. अंकित मगोत्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘थीलीरिया क्लिनिकल निर्णय सहयोग प्रणाली’ भारत में विकसित एक स्वदेशी डिजिटल समाधान है, जो डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली फील्ड स्तर पर प्राप्त जानकारी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित चिकित्सकीय निर्णय लेने में मदद करती है, जिससे रोग का शीघ्र निदान, बेहतर उपचार और पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन को नई मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की अनुसंधान निदेशक डॉ. सुशीला मान, मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशक डॉ. सोनिया सिंधु तथा स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. सुखदीप वोहरा सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

Next Story