Hisar: एचएयू ने मूंग की किस्मों के प्रसार के लिए निजी क्षेत्र से मिलाया हाथ

हिसार: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मूंग की उन्नत किस्मों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज के निर्देशानुसार तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देते हुए हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, रुद्रपुर, उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने गुरुवार काे बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत किस्में ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचे, इसके लिए के साथ समझौता किया गया हैं। उपरोक्त समझौते के तहत विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मूंग की दो किस्में एमएच 1142, एमएच 1762 का बीज तैयार कर कंपनी किसानों तक पहुंचाएगी ताकि उन्हें इन किस्मों का विश्वसनीय बीज मिल सकें और उनकी पैदावार में इजाफा हो सकें।
मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से समझौता ज्ञापन पर अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने तथा हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से जोनल मैनेजर बीएन मिश्रा ने हस्ताक्षर किए।
उन्होंने बताया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी, जिसके तहत उसे बीज का उत्पादन व विपणन करने का अधिकार प्राप्त होगा। इससे किसानों को भी इस उन्नत किस्म का बीज मिल सकेगा। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि खरीफ मौसम में बोई जाने वाली मूंग की एमएच 1142 किस्म को भारत के उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व के मैदानी इलाकों में काश्त के लिए अनुमोदित किया गया है।
इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल व असम राज्य शामिल हैं। इस किस्म की फलियां काले रंग की होती हैं व बीज मध्यम आकार के हरे व चमकीले होते हैं। इसका पौधा कम फैलावदार, सीधा एवं सीमित बढ़वार वाला है, जिससे इसकी कटाई आसान हो जाती है। यह किस्म विभिन्न राज्यों में 63 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इसकी औसत पैदावार भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार 12 क्विंटल से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक आंकी गई है।
एम.एच.1762 किस्म पीला मोज़ैक एवं अन्य रोगों की प्रतिरोधी है। यह किस्म बसंत एवं ग्रीष्म काल में भारत के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में बिजाई के लिए के लिए अनुमोदित की गई है। एम.एच.1762 लगभग 60 दिनों में पक कर तैयार हो जाती हैं। इनके दाने चमकीले हरे रंग के मध्यम आकार के होते है।
ये किस्म सभी प्रचलित किस्मों से 10 -15 प्रतिशत अधिक पैदावार देती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ अनुराग, डॉ. रविका व डॉ. पवन उपस्थित रहे।





