
हिसार: श्री गुरू जम्भेश्वर भगवान के 490वें महानिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में लालासर साथरी में संत समागम व वार्षिक मेला आयोजित किया गया। पर्यावरण एवं जीव रक्षा के सिद्धांतों को स्थापित करने वाले गुरू जाम्भोजी के निर्वाण दिवस पर निर्वाण स्थली लालासर साथरी में हवन पाहल के बाद आगंतुक संतों ने अपने प्रवचन दिए।लालासर साथरी के महंत डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने गुरुवार काे बताया कि बिश्नोई समाज में मार्गशीर्ष बदि नवमी को चिलत नवमी कहा जाता है। इस दिन गुरू जाम्भोजी का पुण्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। सबदवाणी का उद्धरण देते हुए ‘अनैक अनैक चलंता दीठा,कलि का माणस कौन विचारूं’।
उन्होंने बताया कि इस धराधाम पर अनैक दिव्य महापुरुषों का अवतार हुआ और अपना उद्देश्य पूर्ण होने के बाद लीला संवरण किया है। मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद आचार्य ने कहा कि वर्तमान युग में जाम्भोजी के सिद्धांतों के अनुकरण की महत्ती आवश्यकता है। बिश्नोई समाज सदियों से जल, जंगल ज़मीन की रक्षा के लिये समर्पित रहा है। वैचारिक दूषण से मुक्त रहना भी अत्यावश्यक हो गया है। समराथल महंत रामकिशनदास महाराज ने श्रद्धालुओं को पाहल देते हुए नशा मुक्ति व पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया। योगी लालदास महाराज ने सादा भोजन स्वस्थ जीवन के सूत्र बताए। स्वास्थ्य को सबसे प्रथम सुख बताया है। रामेश्वरदास समराथल, शांतानंद श्रीकोलायत, कृष्णानंद बद्रीनाथ, केशवानंद आचार्य, रमतानंद आचार्य मुकाम, स्वामी सत्यनारायण, स्वरूपानंद फिटकासनी सहित पूरे भारतवर्ष से पहुंचे अन्य संतों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। हर वर्ष इस दिन लालासर के वार्षिक मेले में पूरे देशभर के श्रद्धालुओं का आगमन होता है।





