Hisar: फूड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम की मान्यता से जीजेयू को उपलब्धि

हिसार: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के फूड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (एनबीए) से मान्यता मिल गई है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के एनबीए मान्यता प्राप्त कार्यक्रमों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के कमेटी हॉल में कुलपति प्रो. विजय कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें कुलसचिव डॉ. विजय कुमार, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. योगेश चाबा, फूड टेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अराधिता बी. रे सहित वरिष्ठ प्रोफेसर, अधिकारी और विभाग के शिक्षक मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. विजय कुमार ने विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां सामूहिक प्रयासों से हासिल होती हैं। सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने से सफलता निश्चित मिलती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा में तेजी से बदलाव हो रहा है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए शिक्षकों को लगातार नई तकनीकों और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप खुद को अपडेट करना होगा। उन्होंने विभाग के शिक्षकों को मिलजुलकर विभाग की बेहतरी के लिए काम करने की सलाह दी।
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि एनबीए मान्यता से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता को मजबूती मिली है और इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. योगेश चाबा ने बताया कि फूड टेक्नोलॉजी कार्यक्रम एनबीए मान्यता प्राप्त करने वाला विश्वविद्यालय का 10वां कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि एनबीए मान्यता से विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ती है और उद्योगों तथा नियोक्ताओं के बीच डिग्री की विश्वसनीयता मजबूत होती है। एनबीए मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कार्यक्रम वाशिंगटन एकॉर्ड से संबद्ध होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक मान्यता प्राप्त करते हैं। इससे राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. अराधिता बी. रे ने कहा कि मान्यता की प्रक्रिया में विभाग के शिक्षकों ने पूरी मेहनत और दक्षता के साथ कार्य किया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और कमेटी सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिला। बैठक में प्रो. कर्मपाल नरवाल और प्रो. मनीष कुमार ने भी विचार रखे।





