
हिसार: पंचनद शोध संस्थान (प्रज्ञा प्रवाह) क्षेत्रीय अभ्यास वर्ग महिला आयाम की बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई। महिला आयाम के प्रथम सत्र की बैठक ‘पराधीनता से स्वाधीनता और स्वतंत्रता की ओर भारत- महिलाओं का योगदान’ विषय पर आयोजित हुई जिसमें मुख्य प्रस्तोता पंचनद शोध संस्थान महिला आयाम प्रमुख डॉ. मुदिता वर्मा मौजूद रही। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर सह प्रभारी पंचनद शोध संस्थान, महिला आयाम उत्तरी क्षेत्र, डॉ. निष्ठा जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उपाध्यक्ष डॉ. ऋषि गोयल ने की। महिला आयाम का दूसरा सत्र ‘बौद्धिक विमर्श-प्रक्रिया और परिणाम’ विषय पर आयोजित किय गया जिसमें प्रस्तोता के तौर पर प्रज्ञा प्रवाह एवं पंचनद शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. बीके कुठियाला उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा लोक सेवा आयोग की सदस्य श्रीमती ज्योति बैंदा ने की।
प्रथम सत्र की प्रस्तोता डॉ. मुदिता वर्मा ने मंगलवार काे बताया कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल पुरुषों के साहस और बलिदान की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय महिलाओं के त्याग, संघर्ष और राष्ट्र प्रेम का भी स्वर्णिम इतिहास रहा है। उन्होंने बताया कि जब देश अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब भारतीय महिलाओं ने घर की चौखट पार कर स्वतंत्रता के आंदोलन में बढ़-चढक़र भाग लिया।
बौद्धिक विचार के साथ नवाचार को दें बढ़ावा: प्रो. बीके कुठियाला द्वितीय सत्र के प्रस्तोता प्रो. बीके कुठियाला ने बौद्धिक विमर्श-प्रक्रिया एवं परिणाम विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि तर्क, ज्ञान, अनुभव और विचारों के आधार पर गंभीर चर्चा करना बौद्धिक विमर्श में शामिल है।
यह केवल बहस नहीं होती, बल्कि सत्य की खोज, समस्याओं के समाधान और समाज के विकास का माध्यम होती हैं। उन्होंने बताया कि जब विभिन्न लोग अपने विचार साझा करते हैं तब नए दृष्टिकोण सामने आते हैं। यही बौद्धिक विमर्श की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और समाज सुधार सभी क्षेत्रों में बौद्धिक विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस अवसर पर पंचनद शोध संस्थान प्रज्ञा प्रवाह हिसार के अध्यक्ष प्रो. जगबीर सिंह, संरक्षक ज्ञानचंद बंसल व अलग-अलग राज्यों से महिलाओ ने भाग लिया।





