हरियाणा

Aravalli पहाड़ियों पर हाई-पावर्ड कमेटी गठित

Kiran
4 Jun 2026 10:55 AM IST
Aravalli पहाड़ियों पर हाई-पावर्ड कमेटी गठित
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Aravalli अरवल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी के गठन का आदेश दिया है। यह कमेटी अरावली क्षेत्र की सीमा, संरचना और उसके संरक्षण से जुड़े सभी तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन करेगी। इस फैसले का उद्देश्य अरावली पहाड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों और अस्पष्टताओं को समाप्त करना है। अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैला हुआ है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अवैध खनन, शहरीकरण और भूमि उपयोग में बदलाव के कारण इस क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अरावली की सटीक परिभाषा न होने के कारण संरक्षण और नियमों के लागू करने में कठिनाई आ रही है। इसी वजह से एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें पर्यावरण, भूगोल और वन विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में अरावली क्षेत्र में खनन, निर्माण और अन्य गतिविधियों पर सख्त नियम तय किए जा सकते हैं। कोर्ट का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरावली को सही ढंग से परिभाषित और संरक्षित किया गया तो दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण और भूजल संरक्षण में भी मदद मिलेगी। अरावली पहाड़ियां प्राकृतिक अवरोध की तरह काम करती हैं, जो रेगिस्तान के फैलाव को रोकती हैं। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आने वाले समय में क्षेत्रीय विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए भी अहम भूमिका निभाएगा।

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