
गुरुग्राम : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए शुक्रवार को गुरुग्राम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। इसमें एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई गई योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू किया जाए। बैठक में खास तौर पर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सीएएक्यूएमएस) के विस्तार, पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर कार्रवाई, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के प्रबंधन, ठोस कचरा निस्तारण और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि एनसीआर में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है, जिसका समाधान सभी विभागों और राज्यों के आपसी सहयोग से ही संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना और प्रभावी उपाय लागू करना जरूरी है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।
बैठक में परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सीएएक्यूएमएस) के विस्तार पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अधिक संख्या में निगरानी केंद्र स्थापित करने से प्रदूषण के स्तर और उसके कारणों की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। इससे प्रदूषण नियंत्रण के लिए समय पर रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘नो पीयूसीसी-नो फ्यूल’ व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) नहीं रखने वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वाहन प्रदूषण की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।
बैठक में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने को कहा गया। अधिकारियों ने बताया कि पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। ऐसे वाहनों की पहचान कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि एनसीआर क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएं, ताकि लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों। इससे पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कई उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन कराने, निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन और सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया।
ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने और कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा गया। अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कचरा प्रबंधन नियमों का पालन हर स्तर पर हो।
औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी बैठक में समीक्षा की गई। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के इस्तेमाल और मानकों के पालन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की मौसमी स्थिति को देखते हुए तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता खराब होने की संभावना को देखते हुए पहले से प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल एक विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिवहन, नगर निकाय, उद्योग, निर्माण और पर्यावरण विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के अंत में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत की जाए। सरकार का लक्ष्य एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है।
एनसीआर में वायु प्रदूषण लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। ऐसे में शुक्रवार की बैठक को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी विभागों की जिम्मेदारी होगी कि बैठक में तय किए गए उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करें।





