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Haryana गोल्ड मेडल जीतने वाली 26 साल की शूटर नीरू ढांडा के लिए शादी का इंतज़ार किया जा सकता था, लेकिन मेडल का नहीं। जींद ज़िले के संगतपुरा गाँव की रहने वाली इस शूटर ने अपने परिवार को साफ़ कह दिया था कि वह एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में मेडल जीतने के बाद ही शादी करेंगी। भैंस का दूध बेचकर गुज़ारा करने वाले निचले-मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली नीरू ने 19 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की, जिसे ज़्यादातर खेलों के लिए काफ़ी ज़्यादा उम्र माना जाता है।
हालाँकि, उनकी हिम्मत और परिवार व रिश्तेदार सोमबीर श्योराण के मज़बूत समर्थन ने उन्हें शुरुआत से ही आगे बढ़ने में मदद की। सोमबीर ने ही उन्हें शुरू में हर तरह की मदद दी थी। धीरे-धीरे उन्होंने खेल में महारत हासिल की और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) द्वारा चुनी गईं। पिछले साल उनके करियर में एक बड़ी कामयाबी मिली, जब उन्हें सेना की आर्मी मार्कस्मैनशिप यूनिट (AMU) में नायब सूबेदार के तौर पर चुना गया।
नौकरी मिलने के बाद, जब परिवार ने शादी की बात छेड़ी, तो उन्होंने साफ़ कर दिया कि वह एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में मेडल जीतने के बाद ही शादी करेंगी। महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने अपने इस सपने का पहला हिस्सा पूरा कर लिया है, जबकि ओलंपिक गोल्ड उनका अगला लक्ष्य है।
तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की नीरू का एक छोटा भाई है जो ग्रेजुएशन कर रहा है और एक बड़ी बहन है जिसकी शादी हो चुकी है। उनका परिवार एक साधारण से एक कमरे के घर में रहता है, जहाँ बरामदे में भैंसें बंधी रहती थीं और परिवार दूध बेचकर गुज़ारा करता था। घर की बिना पुताई वाली दीवारें अब नीरू के मेडल्स और यादगार चीज़ों से भरी हुई हैं। उनके पिता, किसान सुरेश ढांडा, शुरू में उन्हें शूटिंग करने देने को लेकर हिचकिचा रहे थे क्योंकि इस खेल में काफ़ी खर्च आता था। हालाँकि, उनकी माँ ने उनके फ़ैसले का समर्थन किया। एक रिश्तेदार, सोमबीर श्योराण ने नीरू का हौसला बढ़ाया और 2019 में जब उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की तो ज़रूरी मदद भी दी।
डेंगू भी उनके एशियन गेम्स के सफ़र को नहीं रोक पाया। गेम्स से कुछ समय पहले उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जिससे उनके जाने में चार दिन की देरी हुई। आख़िरकार वह 18 सितंबर के बजाय 21 सितंबर को रवाना हुईं। एक कमरे के घर से लेकर एशियाई खेलों के पोडियम तक, नीरू ने लंबा सफ़र तय किया है। लेकिन अब उनकी नज़रें पूरी तरह से ओलंपिक पर टिकी हैं।
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