
Haryana हरियाणा: वन महोत्सव के अवसर पर इस बार तीन राज्यों की सीमा से सटे कलेसर नेशनल पार्क में केवल पौधे लगाने तक ही सीमित कार्य नहीं किया जाएगा, बल्कि जंगल के पारिस्थितिक तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे। इस पहल के तहत पार्क में घास के खुले मैदान (ग्रासलैंड), ग्रीन कॉरिडोर और स्थायी जल स्रोत विकसित करने की योजना बनाई गई है।
वन विभाग के अनुसार, इस बार का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं है, बल्कि जंगल को एक संतुलित और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध हो सके।
इस योजना का एक प्रमुख लक्ष्य तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। अधिकारियों का मानना है कि जब जंगल के भीतर पर्याप्त घास के मैदान और जल स्रोत उपलब्ध होंगे, तो जानवर भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर नहीं आएंगे।
कलेसर नेशनल पार्क, जो तीन राज्यों की सीमाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है, वन्यजीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। यहां तेंदुआ, हिरण, जंगली सूअर और कई अन्य प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में इस क्षेत्र का संरक्षण और बेहतर प्रबंधन अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
वन विभाग ने बताया कि ग्रासलैंड विकसित करने से शाकाहारी वन्यजीवों को पर्याप्त चारा उपलब्ध होगा, जिससे खाद्य श्रृंखला में संतुलन बना रहेगा। इसके अलावा, ग्रीन कॉरिडोर बनाने से वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित होगी और वे बिना किसी बाधा के जंगल के विभिन्न हिस्सों में जा सकेंगे।
स्थायी जल स्रोत विकसित करने की योजना भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्मियों के मौसम में अक्सर पानी की कमी के कारण वन्यजीवों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते वे गांवों की ओर रुख कर लेते हैं। इस समस्या को रोकने के लिए पार्क के भीतर जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की जाएंगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद करेगी। जंगल के भीतर बेहतर संसाधन उपलब्ध होने से जानवर प्राकृतिक रूप से वहीं रहना पसंद करेंगे।
वन विभाग ने यह भी कहा कि इस अभियान में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े और लोग जंगलों के महत्व को समझ सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समेकित योजना लंबे समय में कलेसर नेशनल पार्क को एक अधिक समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकती है। इससे न केवल वन्यजीवों की संख्या और विविधता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, इस बार का वन महोत्सव कलेसर नेशनल पार्क के लिए केवल पौधारोपण का कार्यक्रम न होकर एक व्यापक पारिस्थितिक सुधार अभियान बन गया है, जिसका उद्देश्य जंगल को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है।





