हरियाणा

Gurugram पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

Kiran
24 Jun 2026 9:57 AM IST
Gurugram पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
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Gurugram गुरुग्राम पुलिस ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री (CM) भगवंत मान से जुड़े एक वायरल "अपमानजनक" (sacrilege) वीडियो के मामले में एक फोरेंसिक एक्सपर्ट की शिकायत पर दो लोगों को गिरफ्तार किया। DLF पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की एक कॉपी मिली है, जिसमें धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे आपराधिक आरोपों वाली साजिश का ब्योरा है। जांच इस आरोप पर केंद्रित है कि दो प्राइवेट कंपनियों - साइफर सेंटिनल लैब और साइबरयान लैब्स - के कर्मचारियों पर दबाव डालकर एक पहले से तय "क्लीन चिट" रिपोर्ट तैयार करवाई गई, ताकि CM को बरी किया जा सके। मामले में तब बड़ी कामयाबी मिली जब जसप्रीत नाम के एक कर्मचारी ने व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई और इस ऑपरेशन से जुड़ी अहम जानकारी लेकर गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया। FIR के मुताबिक, जसप्रीत ने कहा, "अंकित और अरुण ने मुझे खास तौर पर ऐसी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था जो पक्के तौर पर यह साबित करे कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ (डॉक्टरिंग) की गई है, चाहे असल डेटा कुछ भी हो।"

व्हिसलब्लोअर ने उस दबाव का भी जिक्र किया जिसका उसे सामना करना पड़ा। उसने बताया, "जब मैंने इस प्रक्रिया की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए, तो मुझे बताया गया कि 'क्लाइंट' को राजनीतिक बचाव के लिए एक खास नतीजे की जरूरत है। साथ ही, मुझे धमकी दी गई कि अगर मैंने मना किया तो मुझे प्रोफेशनल और पर्सनल नतीजों का सामना करना पड़ेगा।" पुलिस को दिए बयान में जसप्रीत ने रिश्वत की रकम का भी खुलासा किया। उसने आरोप लगाया, "उन्होंने मुझे जाली दस्तावेजों पर साइन करने के लिए 10 लाख रुपये की पेशकश की। मुझे बताया गया कि यह व्यवस्था पहले ही 'सबसे ऊंचे स्तर पर मंजूर' हो चुकी है और मेरे साइन सिर्फ एक औपचारिकता है ताकि दस्तावेजों को कानूनी मान्यता जैसा दिखाया जा सके।"

सूत्रों के मुताबिक, इस साजिश के तहत टेक्नीशियनों को सेक्टर 29 के एक लग्जरी फाइव-स्टार होटल में ले जाया गया, जहां एक बड़े राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के मकसद से जाली स्टैम्प और क्रेडेंशियल्स वाली फर्जी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया। हालांकि शुरुआती पूछताछ में संदिग्धों ने दावा किया है कि उन्हें अपने कामों के गंभीर राजनीतिक नतीजों की जानकारी नहीं थी, लेकिन पुलिस ने इन दावों की पुष्टि के लिए होटल के CCTV फुटेज जब्त कर लिए हैं।

यह घटनाक्रम स्थानीय अधिकारियों के लिए एक चौंकाने वाला यू-टर्न है। सिर्फ 24 घंटे पहले, जब कांग्रेस नेता सुखपाल खैरा ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर पुलिस छापेमारी चल रही है, तो विभाग ने आधिकारिक तौर पर इन खबरों को खारिज कर दिया था और दावा किया था कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मामले को नकारने की स्थिति से अचानक औपचारिक आपराधिक जांच की ओर बढ़ने के कारण, पुलिस के आला अधिकारियों ने आगे की कार्रवाई तय करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है।

ASI तरुण कुमार की अगुवाई में हो रही इस जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। अधिकारी इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्या कभी कोई वास्तविक फोरेंसिक जांच की गई थी या वह दस्तावेज़ पूरी तरह से फर्जी था। इसके अलावा, जांचकर्ता कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर किसी संभावित मिलीभगत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वे खास तौर पर यह देख रहे हैं कि क्या जनता की राय को प्रभावित करने के मकसद से बनाए गए किसी फर्जी दस्तावेज़ को वैधता दिलाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया था। इस साजिश की गहराई के बारे में विभाग की ओर से जल्द ही एक औपचारिक बयान आने की उम्मीद है।

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