
गुरुग्राम: नगर निगम गुरुग्राम की सोमवार को हुई सदन बैठक में खूब हंगामा हुआ। रही। पार्षदों एवं अधिकारियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर खींचतान देखने को मिली। अधिकारियों द्वारा राजस्व रास्तों को बिल्डर्स को देने पर तो हंगामा हुआ ही, साथ ही पार्षदों ने आरोप लगाए कि अधिकारी उनके ना तो फोन उठाते हैं और ना ही वाट्सऐप पर मैसेज का जवाब देते हैं। निगमायुक्त के खिलाफ पार्षदों ने जमकर बवाल काटा।
बैठक की शुरुआत में पार्षद नारायण भड़ाना ने नगर निगम के आयुक्त को घेरा। उन्होंने कहा कि वे उनका फोन तक रिसीव नहीं करते। कॉल व वाट्सऐप मैसेज का भी जवाब नहीं देते। अगर अधिकारी की यह कार्यशैली रही तो जनता के काम कैसे सिरे चढ़ेंगेंं। इस पर निगमायुक्त भी भडक़ गए और बोले कि तुलना ना करें। अधिकारी भी जवाब देना जानते हैं। पार्षद दलीप साहनी जब बोल रहे थे तो उन्हें मेयर राजरानी मल्होत्रा ने टोक दिया। इससे गर्मागर्मी बढ़ गई। इसी बीच नगर निगम आयुक्त भी बोल उठे। उन्होंने कहा कि ऐसा हाउस मैनें नहीं देखा कभी। नेता बनकर सुर्खियां बटोरे लोगे। बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाए कि शहरी में पानी की मोटर बंद-चालू करने की समस्या है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। गर्मी में पानी की सप्लाई ढंग से नहीं हो रही। पार्षदों के फोन अधिकारी उठाते नहीं।
शिकवे-शिकायतों भरी बैठक के बीच यह निर्णय लिया गया कि सेक्टर-15 व्यापार सदन की खाली जमीन को नीलाम किया जाएगा। वहां व्यवसायिक टावर, एससीओ, गु्रप हाउसिंग के लिए प्लॉट नीलाम किए जाएंगें। नगर निगम सदन की बैठक में सेक्टर-111, 113 और 114 में पुराने राजस्व रास्तों को बिल्डरों को बेचने का प्रस्ताव भी रखा गया। निगम का कहना है कि ये रास्ते अब केवल कागजों पर हैं। बड़े प्रोजेक्ट के बीच आ रहे हैं। मंगलाम मल्टीप्लेक्स, नवज्योति डेवलपर्स, उत्तम बिल्डमार्ट जैसे बिल्डरों ने इन रास्तों को सरकारी दर पर खरीदने का प्रस्ताव दिया है।





