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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य भर के बाल देखभाल संस्थानों में सीसीटीवी निगरानी मानदंडों को कड़ा कर दिया है, बच्चों की गोपनीयता और सुरक्षा की रक्षा के लिए व्यक्तिगत उपकरणों के माध्यम से दूरस्थ पहुंच और फुटेज के अनधिकृत साझाकरण पर रोक लगा दी है। आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण द्वारा बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ए) के तहत जारी की गई वैधानिक सलाह उन निरीक्षणों के बाद है, जिसके दौरान आयोग को व्यक्तिगत मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़े कई संस्थानों में सीसीटीवी सिस्टम मिले। इसमें पाया गया कि इस तरह की व्यवस्थाएं संभावित रूप से प्राधिकरण के बिना लाइव फुटेज को एक्सेस करने, डाउनलोड करने या प्रसारित करने की अनुमति देकर सुरक्षा जोखिम पैदा करती हैं।
दिशानिर्देशों के तहत, सीसीटीवी सिस्टम, फुटेज और पासवर्ड का नियंत्रण विशेष रूप से संस्थान के प्रभारी के पास रहना चाहिए। पासवर्ड साझा करना प्रतिबंधित है, साथ ही कैमरे को निजी मोबाइल फोन या लैपटॉप से कनेक्ट करना भी प्रतिबंधित है। रिमोट एक्सेस डिफ़ॉल्ट रूप से अक्षम रहना चाहिए। एडवाइजरी सीसीटीवी मॉनिटर की तस्वीरें खींचने, उनकी स्क्रीन रिकॉर्ड करने, या व्हाट्सएप, सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से फुटेज डाउनलोड करने, कॉपी करने या प्रसारित करने पर भी रोक लगाती है।
बच्चों की गोपनीयता की रक्षा के लिए, किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के अनुसार, शौचालय, बाथरूम या चेंजिंग एरिया के अंदर कैमरे नहीं लगाए जाने चाहिए। संस्थानों को अधिकृत उपयोगकर्ताओं और फुटेज पुनर्प्राप्ति का एक रजिस्टर बनाए रखने, पहुंच या पुनर्प्राप्ति के प्रत्येक उदाहरण की तारीख, उद्देश्य और प्राप्तकर्ता का दस्तावेजीकरण करने का भी निर्देश दिया गया है। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा है। निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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