
गुरुग्राम। शहर की मुख्य सड़कों और सेक्टरों में बढ़ते अतिक्रमण पर अब गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) लगातार नजर रखेगा। सेक्टर-58 से सेक्टर-80 तक जीएमडीए की राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) को अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण से मुक्त रखने के लिए प्राधिकरण ने पेट्रोलिंग टीमों और वाहनों की तैनाती का टेंडर जारी किया है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित क्षेत्र में नियमित गश्त कर अतिक्रमण की निगरानी की जाएगी और आरओडब्ल्यू पर दोबारा कब्जा करने की कोशिशों को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
जीएमडीए की ओर से उठाया गया यह कदम शहर में सड़क किनारे बढ़ते अवैध कब्जों और सार्वजनिक स्थानों के अनधिकृत इस्तेमाल को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर के कई प्रमुख मार्गों और सेक्टरों में सड़क के किनारे अस्थायी दुकानें, रेहड़ियां, खोखे, निर्माण सामग्री और अन्य सामान रखे जाने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई स्थानों पर फुटपाथ और सड़क की निर्धारित जगह पर अतिक्रमण होने से पैदल यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सेक्टर-58 से सेक्टर-80 तक का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। यहां बड़ी संख्या में आवासीय सोसायटियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य निर्माण परियोजनाएं मौजूद हैं। आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़कों पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आरओडब्ल्यू को अतिक्रमण से मुक्त रखना जीएमडीए के लिए अहम चुनौती है। प्राधिकरण की योजना है कि निगरानी व्यवस्था को नियमित और प्रभावी बनाकर अतिक्रमण की समस्या पर शुरुआत से ही नियंत्रण किया जाए।
नियमित पेट्रोलिंग से होगी निगरानी
टेंडर के माध्यम से तैनात की जाने वाली पेट्रोलिंग टीमें निर्धारित क्षेत्रों में नियमित रूप से गश्त करेंगी। टीमों के साथ वाहनों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि बड़े क्षेत्र में तेजी से निगरानी की जा सके। किसी स्थान पर अतिक्रमण पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
अतिक्रमण हटाने के बाद अक्सर कुछ समय बीतने पर उसी स्थान पर दोबारा कब्जा किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में केवल अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं माना जाता। जीएमडीए की नई व्यवस्था का उद्देश्य हटाए गए अतिक्रमण वाले स्थानों पर दोबारा कब्जा न होने देना भी है। नियमित पेट्रोलिंग के जरिए ऐसे स्थानों पर विशेष नजर रखी जा सकेगी।
आरओडब्ल्यू पर कब्जे से प्रभावित होता है यातायात
राइट ऑफ वे किसी सड़क या सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित वह क्षेत्र होता है, जिसका उपयोग सड़क, फुटपाथ, नालियों, हरित पट्टी और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। इस क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण या सामान रखने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो सकती है। इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ता है।
गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सड़क नेटवर्क पर पहले से ही वाहनों का दबाव है। ऐसे में सड़क किनारे होने वाला अतिक्रमण समस्या को और गंभीर कर देता है। कई बार अतिक्रमण के कारण वाहन चालकों को सड़क के छोटे हिस्से में चलना पड़ता है, जिससे जाम की स्थिति बनती है। वहीं, पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए भी सुरक्षित स्थान कम हो जाता है।
स्थायी निर्माण पर भी रहेगी नजर
जीएमडीए की योजना केवल रेहड़ी-पटरी या अस्थायी कब्जों तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण की आरओडब्ल्यू को स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त रखने की कोशिश है। स्थायी अतिक्रमण के तहत सड़क की निर्धारित सीमा में किए गए अनधिकृत निर्माण, चारदीवारी, शेड या अन्य संरचनाएं भी निगरानी के दायरे में आ सकती हैं।
पेट्रोलिंग टीमों की नियमित मौजूदगी से ऐसे निर्माण कार्यों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही किए जाने की उम्मीद है। इससे नए अतिक्रमण को बढ़ने से पहले रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही, पहले से चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर भी लगातार निगरानी रखी जा सकेगी।
विकास कार्यों में भी आएगी सुविधा
आरओडब्ल्यू को अतिक्रमण मुक्त रखने का एक अन्य लाभ शहर के विकास कार्यों को भी मिल सकता है। सड़क चौड़ीकरण, फुटपाथ निर्माण, ड्रेनेज, यूटिलिटी लाइन और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों के लिए निर्धारित जमीन उपलब्ध रहना जरूरी है। यदि आरओडब्ल्यू पर कब्जा रहता है तो भविष्य में विकास परियोजनाओं को लागू करने में बाधा आ सकती है।
जीएमडीए की ओर से पेट्रोलिंग टीमों और वाहनों की तैनाती के लिए टेंडर जारी किए जाने से अब निगरानी व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके जरिए प्राधिकरण को क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की नियमित जानकारी मिल सकेगी और जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
शहर के तेजी से विस्तार को देखते हुए अतिक्रमण नियंत्रण को लेकर आने वाले समय में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सेक्टर-58 से सेक्टर-80 तक आरओडब्ल्यू की नियमित निगरानी से जहां सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है, वहीं सार्वजनिक जमीन के अनधिकृत इस्तेमाल पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेट्रोलिंग टीमों की तैनाती कब तक होती है और मैदान में उतरने के बाद वे किस तरह से निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाती हैं। यदि नियमित गश्त और समय पर कार्रवाई का सिस्टम प्रभावी रहा तो इस क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या को नियंत्रित करने में जीएमडीए को मदद मिल सकती है।





