
पंचकूला : हरियाणा के पंचकूला में निर्माणाधीन पुरातत्व संग्रहालय को लेकर पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे संग्रहालय का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन इससे पहले ही लाखों रुपये का फर्नीचर खरीद लिया गया। यह मामला सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पंचकूला के सेक्टर-5 में बन रहे पुरातत्व संग्रहालय के लिए 87 लाख 84 हजार 190 रुपये का फर्नीचर खरीदा गया है। हालांकि, संग्रहालय भवन अभी निर्माणाधीन है, जिसके चलते खरीदा गया फर्नीचर फिलहाल सेक्टर-12ए स्थित नाहन कोठी में रखा गया है।
इस मामले का खुलासा जगाधरी निवासी राजकुमारी की ओर से दायर की गई आरटीआई के जवाब में हुआ। उन्होंने 18 मई 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पुरातत्व विभाग से संग्रहालय निर्माण और फर्नीचर खरीद से जुड़ी जानकारी मांगी थी। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के बाद यह मामला सामने आया।
आरटीआई में पूछे गए सवालों के जवाब में विभाग ने बताया कि संग्रहालय के लिए फर्नीचर की खरीद की गई है और उसे सुरक्षित रखने के लिए नाहन कोठी में रखा गया है। हालांकि, भवन निर्माण पूरा होने से पहले इतनी बड़ी राशि खर्च कर फर्नीचर खरीदने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जब संग्रहालय अभी तैयार नहीं हुआ है तो फर्नीचर खरीदने की इतनी जल्दी क्यों की गई। उनका तर्क है कि निर्माण कार्य पूरा होने और जरूरत के अनुसार फर्नीचर खरीदने से सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सकता था।
वहीं, इस मामले को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में खरीद प्रक्रिया आमतौर पर निर्माण की प्रगति और आवश्यकता के आधार पर की जाती है, ताकि सामान लंबे समय तक बेकार न पड़ा रहे और उसकी गुणवत्ता भी बनी रहे।
फिलहाल खरीदा गया फर्नीचर नाहन कोठी में रखा हुआ है। ऐसे में उसकी सुरक्षा, रखरखाव और खराब होने की संभावना को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। यदि लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया तो फर्नीचर की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे सरकारी खर्च का उद्देश्य प्रभावित होगा।
बताया जा रहा है कि पंचकूला सेक्टर-5 में बनने वाला यह पुरातत्व संग्रहालय राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। संग्रहालय में राज्य की पुरातात्विक विरासत, ऐतिहासिक वस्तुओं और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित किए जाने की योजना है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले फर्नीचर खरीदने का फैसला किस आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
आरटीआई कार्यकर्ता और शिकायतकर्ता राजकुमारी ने भी इस मामले में सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी परियोजनाओं में किस तरह धन खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि फर्नीचर खरीद की प्रक्रिया, टेंडर और भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
वहीं, विभाग की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि खरीदी गई सामग्री को सुरक्षित रखा गया है और संग्रहालय का निर्माण पूरा होने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई जांच शुरू की जाती है या नहीं। निर्माणाधीन संग्रहालय के लिए पहले ही फर्नीचर खरीदने का मामला सामने आने के बाद परियोजना की पारदर्शिता और सरकारी खर्च को लेकर बहस तेज हो गई है।





