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पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने प्रदेश में शिक्षा के निजीकरण को लेकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार पर लगाया आरोप

Admin Delhi 1
22 Aug 2022 5:31 PM IST
पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने प्रदेश में शिक्षा के निजीकरण को लेकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार पर लगाया आरोप
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हरयाणा न्यूज़: कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि शिक्षा को बढ़ावा दिए बिना बेहतरीन वर्क फोर्स तैयार नहीं की जा सकती। इसलिए भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार सरकारी स्कूलों को बंद करने की बजाए नए स्कूल खोलने पर ध्यान दे। रेशनेलाइजेशन के बहाने जिस तरह से टीचर्स के पदों को समाप्त किया जा रहा है, इसके विपरित इन पदों को भरने का प्रयास करे। इससे न सिर्फ शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों से बेहद शिक्षित व अनुशासित छात्र देश-प्रदेश के लिए तैयार कर सकेंगे।

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक 284 प्राथमिक व मिडिल सरकारी स्कूलों को बंद कर चुकी है। इनमें से 105 स्कूलों को तो पिछले दिनों ही बंद किया गया था। पिछले दिनों सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि सरकारी स्कूलों में अध्यापकों के 35980 पद खाली पड़े हैं। लेकिन, अब ट्रांसफर ड्राइव के बहाने किए जा रहे रेशनेलाइजेशन में इनमें से 20 हजार पदों को खत्म किया जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों को बंद करने व खाली पदों को न भरने के विरोध में छात्र, अभिभावक, टीचर व पंचायतें लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। सैकड़ों स्कूलों में तालाबंदी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद गठबंधन सरकार इनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही है। इससे साफ है कि स्कूलों को बंद करने और टीचर्स की पोस्ट कम करने के पीछे कोई बड़ी प्लानिंग व षड्यंत्र चल रहा है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि सूचनाएं मिल रही हैं कि प्रदेश में शिक्षा का निजीकरण करने की पटकथा भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार लिख चुकी है। स्कूलों के भवनों को छात्रों, स्टाफ, संसाधन व जमीनों समेत निजी हाथों में देने की तैयारी की गई है। इससे साफ है कि स्कूल संचालित करने के नाम पर इनके बड़े-बड़े भवन व ग्राउंड को निशुल्क निजी हाथों में दे दिया जाएगा और इसकी आड़ में अरबों रुपये कमीशन के तौर पर लिए जाएंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को जो पद खाली रह जाएंगे, उन्हें भी स्थाई भर्ती से भरने की गठबंधन सरकार की कोई मंशा नहीं है। उक्त पदों को रोजगार कौशल निगम के तहत अनुबंध पर रखने की रणनीति बनाई गई है। जब शिक्षक अनुबंध पर होंगे तो वे परीक्षा परिणाम के प्रति उत्तरदायी नहीं होंगे। ऐसे में शिक्षा का स्तर और अधिक गिर जाएगा।

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