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दूध और खाद से हो रही आय
चंडीगढ़: हरियाणा में देसी नस्ल की गायें किसानों के लिए आय का नया जरिया बन रही हैं। किसान अब सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं बल्कि गोबर से तैयार जैविक खाद और अन्य उत्पादों के जरिए भी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। देसी गायों के पालन से खेती को भी फायदा मिल रहा है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य के कई किसान देसी नस्ल की गायों को अपनाकर पशुपालन और खेती को जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इन गायों से मिलने वाला दूध बेहतर गुणवत्ता वाला होता है, वहीं गोबर और मूत्र का इस्तेमाल खेतों में जैविक खाद और प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहा है।
दूध के साथ बढ़ रही अतिरिक्त आमदनी
देसी गायों का दूध बाजार में अच्छी कीमत पर बिक रहा है। कई किसान सीधे ग्राहकों तक दूध पहुंचाकर सामान्य बिक्री से ज्यादा लाभ कमा रहे हैं। इसके अलावा घी, दही और अन्य दुग्ध उत्पाद बनाकर भी आय बढ़ाई जा रही है।
जैविक खाद से खेती को फायदा
देसी गायों से मिलने वाले गोबर से तैयार खाद खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है। किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे खेती की लागत घट रही है और उत्पादन को भी लाभ मिल रहा है।
देसी नस्लों को मिल रहा बढ़ावा
हरियाणा में साहिवाल, हरियाणा और अन्य देसी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पशुपालन विभाग भी किसानों को बेहतर नस्ल, स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से पालन की जानकारी दे रहा है।
किसानों के लिए रोजगार का नया रास्ता
कई ग्रामीण परिवारों के लिए देसी गाय पालन अब खेती के साथ स्थायी आय का साधन बन रहा है। किसान दूध, खाद और जैविक उत्पादों के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देसी गाय आधारित खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
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