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हरियाणा में धान खरीद को लेकर किसानों का हंगामा, जींद-असंध मार्ग पर लगाया जाम

Kavita2
8 Oct 2026 12:28 PM IST
हरियाणा में धान खरीद को लेकर किसानों का हंगामा, जींद-असंध मार्ग पर लगाया जाम
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चंडीगढ़। हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद कई अनाज मंडियों में किसानों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। प्रदेशभर की मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर खरीद प्रक्रिया में देरी से किसानों में नाराजगी है। बुधवार को जींद जिले की अलेवा अनाज मंडी में धान की खरीद शुरू नहीं होने से गुस्साए किसानों ने जींद-असंध मार्ग के मुख्य चौक पर जाम लगा दिया। किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहन सड़क पर खड़े कर दिए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, फतेहाबाद में भी किसानों ने धान खरीद में देरी के विरोध में प्रदर्शन किया। दूसरी ओर अंबाला की मंडियों में निगरानी बढ़ाई गई है, जबकि यमुनानगर में बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

सरकार ने पीआर किस्म के धान की खरीद 29 सितंबर से शुरू कर दी थी, लेकिन राइस मिलर्स के पंजीकरण और मिल आवंटन से जुड़ी समस्याओं के कारण कुछ मंडियों में खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

धान खरीद शुरू नहीं होने पर सड़क पर उतरे किसान

जींद जिले की अलेवा अनाज मंडी में धान लेकर पहुंचे किसानों ने बुधवार को खरीद शुरू नहीं होने के विरोध में प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि वे कई दिनों से मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नाराज किसानों ने जींद-असंध मार्ग पर जाम लगा दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बसों और अन्य वाहनों में सवार यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ी।

किसानों का कहना था कि जब सरकार ने धान खरीद की तारीख घोषित कर दी है, तो मंडियों में भी उसी के अनुसार व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनकी फसल की सरकारी खरीद तत्काल शुरू कराई जाए, ताकि उन्हें लंबे समय तक मंडी में इंतजार न करना पड़े।

मंगलवार को ही दी थी आंदोलन की चेतावनी

अलेवा के किसानों ने बुधवार के प्रदर्शन से पहले मंगलवार को अनाज मंडी में धरना दिया था।

इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर खरीद प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की थी।

किसानों ने चेतावनी दी थी कि यदि बुधवार सुबह 11 बजे तक पीआर धान की खरीद शुरू नहीं हुई, तो वे सड़क जाम करने के लिए मजबूर होंगे।

निर्धारित समय तक खरीद शुरू नहीं होने पर किसानों ने अपना विरोध तेज कर दिया।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि मंडियों में फसल लेकर आने के बाद खरीद के लिए इंतजार करना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है।

अधिकारियों के पहुंचने के बाद शुरू हुई खरीद

जाम की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

अलेवा थाना प्रभारी आत्माराम और नायब तहसीलदार ओंकार दत्त शर्मा ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया।

हालांकि, किसान धान की खरीद शुरू होने तक जाम नहीं खोलने की मांग पर अड़े रहे।

इसके बाद उचाना की एसडीएम सुमन यादव और हैफेड के जिला प्रबंधक अनुराग मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने किसानों के प्रतिनिधियों के साथ अलेवा अनाज मंडी पहुंचकर सरकारी खरीद एजेंसी के माध्यम से पीआर धान की खरीद शुरू कराई।

इसके बाद किसानों ने सड़क से जाम हटाने पर सहमति जताई। करीब दो घंटे तक चले जाम के कारण यातायात प्रभावित रहा।

राइस मिलर्स के पंजीकरण में देरी बनी परेशानी

हरियाणा की कुछ मंडियों में धान खरीद प्रभावित होने के पीछे राइस मिलर्स के पंजीकरण और चावल मिलों के आवंटन की समस्या सामने आई है।

सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान को आगे प्रसंस्करण के लिए निर्धारित चावल मिलों में भेजा जाता है।

लेकिन मिल आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से कुछ स्थानों पर खरीद व्यवस्था शुरू करने में देरी हुई।

जींद की नई अनाज मंडी में भी हैफेड को खरीद एजेंसी बनाया गया है। वहां चावल मिल आवंटित नहीं होने के कारण पीआर धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद प्रभावित होने की शिकायत सामने आई थी।

आढ़तियों और किसानों ने अधिकारियों से इस समस्या का समाधान कराने की मांग की है।

जींद में 31,380 मीट्रिक टन धान की आवक

जींद जिले की मंडियों में धान की आवक लगातार हो रही है।

सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जिले की मंडियों में अब तक 31,380 मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है, जबकि 5,253 मीट्रिक टन की खरीद दर्ज की गई है।

आवक और खरीद के बीच इस अंतर के कारण किसानों की चिंता बढ़ रही है।

हालांकि, मंडियों में पहुंचा पूरा धान एक ही किस्म या सरकारी खरीद की पात्र श्रेणी का हो, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए कुल आवक और सरकारी खरीद के आंकड़ों को सीधे लंबित खरीद की मात्रा नहीं माना जा सकता।

इसके बावजूद जिन किसानों का पात्र धान खरीद के इंतजार में पड़ा है, उनके लिए देरी परेशानी का कारण बनी हुई है।

फतेहाबाद में भी किसानों ने जताई नाराजगी

जींद के अलावा फतेहाबाद जिले में भी धान खरीद में देरी का विरोध सामने आया।

रतिया में किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर धरना दिया।

किसानों का आरोप था कि खरीद प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी हो रही है।

प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाने की मांग की।

स्थानीय प्रशासन ने किसानों से बातचीत की और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

इस तरह जींद और फतेहाबाद दोनों जिलों में खरीद व्यवस्था को लेकर किसानों की नाराजगी सामने आई।

अंबाला की मंडियों में पुलिस निगरानी बढ़ी

धान खरीद के बीच अंबाला जिले की अनाज मंडियों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।

मंडियों में बढ़ती आवक के दौरान व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

फसल लेकर आने वाले वाहनों, खरीद गतिविधियों और मंडी परिसर में आवागमन को व्यवस्थित रखने की आवश्यकता है।

इस बीच पुलिस निगरानी बढ़ने से मंडियों में गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

किसानों के लिए खरीद के साथ-साथ फसल की तुलाई, भुगतान और समय पर उठान की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

यमुनानगर में बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता

यमुनानगर जिले में मंगलवार को हुई बारिश ने धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी।

खरीफ सीजन के दौरान जब धान की कटाई और मंडियों में आवक चल रही हो, तब बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

विशेष रूप से खुले स्थानों पर रखी फसल को नमी से बचाना जरूरी होता है।

धान में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में किसानों के लिए मंडियों में फसल को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था होना महत्वपूर्ण है।

बारिश के बीच किसानों की चिंता खरीद में हो रही देरी को लेकर भी बनी हुई है।

सरकार का दावा, निर्धारित समय से पहले शुरू की खरीद

हरियाणा सरकार का कहना है कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष धान की खरीद निर्धारित समय से पहले शुरू की गई है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने 6 अक्टूबर को बताया था कि खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए धान खरीद की निर्धारित शुरुआत 1 अक्टूबर थी।

लेकिन किसानों को राहत देने के उद्देश्य से इसे 29 सितंबर से शुरू कर दिया गया।

सरकार के अनुसार, खरीद प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक जारी रहेगी।

राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की पात्र उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करना है।

उन्होंने मंडियों में खरीद व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने की बात भी कही।

खरीद के साथ फसल का उठान भी जरूरी

धान खरीद के दौरान केवल फसल खरीदना ही पर्याप्त नहीं है। मंडियों से खरीदी गई उपज का समय पर उठान भी जरूरी होता है।

यदि खरीदा गया धान लंबे समय तक मंडियों में पड़ा रहे, तो नई आवक के लिए जगह की समस्या पैदा हो सकती है।

किसानों और आढ़तियों के लिए यह भी आवश्यक है कि तुलाई, खरीद और परिवहन की प्रक्रिया समय पर पूरी हो।

राइस मिलों के आवंटन में देरी से खरीद और उठान दोनों व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।

इसी कारण किसान खरीद एजेंसियों और प्रशासन से सभी प्रक्रियाओं को जल्द व्यवस्थित करने की मांग कर रहे हैं।

किसानों को खरीद नियमित रहने का इंतजार

अलेवा में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद धान की खरीद शुरू होने से किसानों का प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन उन्होंने खरीद आगे भी नियमित रखने की मांग की है।

किसानों ने आशंका जताई कि यदि चावल मिलों का आवंटन पूरा नहीं हुआ तो कुछ ढेरियों की खरीद के बाद प्रक्रिया दोबारा रुक सकती है।

फिलहाल हरियाणा की मंडियों में धान की बढ़ती आवक के बीच खरीद एजेंसियों के सामने समय पर खरीद, उठान और किसानों की समस्याओं का समाधान करने की चुनौती है।

सरकार ने निर्धारित समय से पहले खरीद शुरू करने की बात कही है, जबकि किसान चाहते हैं कि घोषित व्यवस्था का लाभ हर संबंधित मंडी में समय पर मिले।

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