Faridabad: तिरंगा यात्रा में बच्चों की तबीयत बिगड़ने से मचा हड़कंप, कई को उल्टियां

फरीदाबाद: फरीदाबाद में गुरुवार को आयोजित भाजपा की तिरंगा यात्रा के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रा में शामिल कई स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक खराब हो गई। राज्य के खेल मंत्री गौरव गौतम की मौजूदगी में निकाली जा रही इस यात्रा के दौरान उमड़ी भारी भीड़, गर्मी और अव्यवस्था के कारण कई स्टूडेंट्स को उल्टियां होने लगीं, जबकि कुछ छात्र चक्कर खाकर जमीन पर गिर गए। अचानक बच्चों को बेहोश होते देख वहां मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों में हडक़ंप मच गया। शिक्षकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत बच्चों को संभाला और उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाया। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत इस तिरंगा यात्रा की शुरुआत बेहद उत्साहजनक माहौल में हुई थी। इसमें क्षेत्र के कई सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को शामिल किया गया था। यात्रा में खेल मंत्री गौरव गौतम मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल थे और उनके साथ भारी संख्या में स्थानीय नेता, प्रशासनिक अधिकारी और आम लोग चल रहे थे।
यात्रा जैसे ही अपने तय रूट पर आगे बढ़ी, वैसे ही अचानक माहौल बदलने लगा। चश्मदीदों के मुताबिक, यात्रा के दौरान अचानक भारी भीड़ का दबाव बढ़ गया और हवा की कमी के चलते घुटन होने लगी। इसी दौरान कतार में चल रहे कुछ बच्चों का जी मिचलाने लगा और उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं। देखते ही देखते कुछ अन्य स्टूडेंट्स गश खाकर सडक़ पर गिरने लगे। छात्रों को इस हालत में देखकर यात्रा में साथ चल रहे शिक्षकों ने तुरंत उन्हें संभाला। उन्होंने बेहोश हो रहे बच्चों को गोद में उठाकर सडक़ के किनारे छायादार जगहों पर पहुंचाया। शिक्षकों और उनके साथी छात्रों ने तुरंत अपने पास मौजूद पानी की बोतलों से बच्चों के मुंह पर पानी के छींटे मारे और उन्हें पानी दिया।
पेरेंट्स ने भी अपने स्तर पर संभालकर बच्चों को शांत कराया और उन्हें हवा की, जिससे कुछ देर में बच्चों की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद अभिभावकों और आम जनता ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को यात्रा में शामिल किया गया था, तो वहां पर्याप्त मात्रा में मेडिकल टीमें, एम्बुलेंस और पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे। भीड़ नियंत्रण और बच्चों की सुरक्षा को लेकर की गई लापरवाही की वजह से यह बड़ा हादसा होने की नौबत आई। गनीमत रही कि शिक्षकों ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था।





