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Chandigarh चंडीगढ़ हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के प्रस्ताव का बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने विरोध तेज कर दिया है। इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को खारिज करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस देने के बजाय सरकारी बिजली वितरण कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को मजबूत किया जाना चाहिए।
मामला गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़ा है। दिल्ली स्थित इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने HERC के समक्ष इन दोनों जिलों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की मांग की है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में बिजली वितरण का जिम्मा मुख्य रूप से DHBVN के पास है। निजी कंपनी का तर्क है कि समानांतर वितरण व्यवस्था से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्तिकर्ता चुनने का विकल्प मिलेगा और प्रतिस्पर्धा के कारण बिजली आपूर्ति तथा ग्राहक सेवाओं में सुधार हो सकता है। कंपनी ने गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह में बढ़ती बिजली मांग को भी अपने प्रस्ताव का आधार बताया है। दूसरी तरफ बिजली कर्मचारी संगठन इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि गुरुग्राम जैसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्र में निजी कंपनी के आने से सरकारी बिजली वितरण निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। संगठनों का दावा है कि अगर ज्यादा बिजली खपत करने वाले औद्योगिक, वाणिज्यिक और बड़े उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर जाते हैं तो DHBVN के राजस्व पर असर पड़ सकता है। हालांकि ये कर्मचारी संगठनों की आशंकाएं हैं और प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नियामक आयोग को करना है।
सरकारी बिजली निगम को मजबूत करने की मांग
EEFI ने कहा है कि सरकार को निजी समानांतर वितरण व्यवस्था की जगह DHBVN में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने, बिजली नेटवर्क का आधुनिकीकरण करने और व्यवस्था में कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। संगठन ने HERC से इलेवन पावर की याचिका स्वीकार नहीं करने की मांग की है। इस मुद्दे पर हरियाणा पावर एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स जॉइंट स्ट्रगल फ्रंट भी लगातार विरोध कर रहा है। इससे पहले संगठन से जुड़े कर्मचारियों और इंजीनियरों ने प्रदर्शन कर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि समानांतर लाइसेंस से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था कमजोर हो सकती है। संगठनों ने लाइसेंस दिए जाने की स्थिति में आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।
HERC के सामने चल रही प्रक्रिया
HERC ने इलेवन पावर की याचिका पर विचार के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। इस समिति ने निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति दिए जाने के पक्ष में रिपोर्ट दी। इसके बाद आयोग ने संबंधित पक्षों से रिपोर्ट पर नए सिरे से टिप्पणियां और आपत्तियां मांगी थीं। सरकारी बिजली कंपनियों DHBVN और UHBVN ने भी इस प्रक्रिया में अपनी आपत्तियां रखी हैं। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा सरकार स्वयं इस प्रस्ताव का विरोध कर चुकी है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने विधानसभा में कहा था कि सरकार ने HERC के सामने निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि HERC एक स्वायत्त नियामक संस्था है और बिजली वितरण लाइसेंस पर फैसला करने का अधिकार आयोग के पास है। सरकार ने जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने की बात भी कही थी।
सार्वजनिक सुनवाई की भी मांग
हरियाणा सरकार ने HERC से इस मामले में अंतिम फैसला लेने से पहले सार्वजनिक सुनवाई कराने को भी कहा है। सरकार का कहना है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए और संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। कर्मचारी संगठनों के साथ किसान संगठन भी इस मुद्दे पर आपत्ति जता चुके हैं। उनका कहना है कि बिजली वितरण में निजी कंपनी के प्रवेश के संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन होना चाहिए। खासकर किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और सब्सिडी वाली बिजली व्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर संगठनों ने चिंता जताई है। ये दावे फिलहाल विरोध करने वाले संगठनों की ओर से किए जा रहे हैं।
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