
चाकुलिया: पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस बुधवार सुबह एक बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई। ट्रेन के लोको पायलट की सतर्कता और सूझबूझ के कारण रेलवे ट्रैक पर आए हाथियों के झुंड से टक्कर टल गई। समय रहते ट्रेन को रोक लिए जाने से एक बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।
जानकारी के अनुसार, यह घटना बुधवार सुबह करीब 5:26 बजे चाकुलिया और कोकपाड़ा रेलवे स्टेशन के बीच सुनसुनिया रेल फाटक के पास हुई। उस समय उत्कल एक्सप्रेस चाकुलिया स्टेशन से आगे बढ़ चुकी थी और हरिद्वार की ओर अपने निर्धारित मार्ग पर जा रही थी।
बताया गया कि ट्रेन सुबह करीब 5:20 बजे चाकुलिया स्टेशन से रवाना हुई थी। इसके लगभग छह मिनट बाद जब ट्रेन सुनसुनिया रेल फाटक के समीप पहुंची, तभी अचानक जंगल की ओर से हाथियों का एक झुंड निकलकर रेलवे ट्रैक पार करने लगा।
हाथियों का यह झुंड सुनसुनिया जंगल से निकलकर एरोड्रम क्षेत्र की ओर जा रहा था। झुंड के कई हाथी रेलवे ट्रैक पार कर चुके थे, लेकिन तीन से चार हाथी अभी भी पटरी पर खड़े थे। उसी समय उत्कल एक्सप्रेस उसी ट्रैक पर आगे बढ़ रही थी।
लोको पायलट ने दूर से ही ट्रैक पर हाथियों को देख लिया। उन्होंने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन की गति कम की और आपात स्थिति को भांपते हुए ट्रेन को रोक दिया। लोको पायलट की त्वरित कार्रवाई से ट्रेन हाथियों से टकराने से बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन रुकने के बाद कुछ समय तक हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक के आसपास मौजूद रहा। जब सभी हाथी सुरक्षित रूप से ट्रैक पार कर जंगल की ओर चले गए, तब ट्रेन को आगे बढ़ाया गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे और वन विभाग लगातार निगरानी रखते हैं। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करने और लोको पायलटों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाते हैं।
चाकुलिया और आसपास का इलाका हाथियों के आवागमन के लिए जाना जाता है। यहां अक्सर जंगल से निकलकर हाथी रेलवे ट्रैक और सड़कों के आसपास पहुंच जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में ट्रेन संचालन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है।
रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि लोको पायलट की सतर्कता न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है। इस घटना में चालक ने समय रहते सही निर्णय लेकर इंसानों और हाथियों दोनों की जान बचाई।
घटना के बाद रेलवे और वन विभाग के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों के आसपास रेलवे लाइन होने के कारण अक्सर हाथियों के ट्रैक पर आने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में ट्रेनों की गति और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में यात्री सफर कर रहे थे। ट्रेन के अचानक रुकने से यात्रियों को कुछ समय के लिए परेशानी हुई, लेकिन बाद में उन्हें घटना की जानकारी दी गई। सभी यात्री सुरक्षित रहे और ट्रेन अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि रेलवे संचालन में चालक की सतर्कता और अनुभव कितने महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लोको पायलट समय पर निर्णय नहीं लेते तो यह घटना गंभीर हादसे में बदल सकती थी।
रेलवे अधिकारियों ने लोको पायलट की सूझबूझ की सराहना की है। वहीं, वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि हाथियों के प्राकृतिक मार्गों की सुरक्षा और ऐसे क्षेत्रों में सावधानीपूर्वक रेल संचालन बेहद जरूरी है।





