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GURUGRAM गुरुग्राम: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर और नोएडा में कई स्थानों पर चलाए गए अभियान के बारे में जानकारी दी। ईडी के मुताबिक, गुरुग्राम स्थित जोनल कार्यालय ने 26 और 27 अगस्त 2025 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के तहत दिल्ली-एनसीआर और नोएडा में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी ने यह कार्रवाई फरीदाबाद, हरियाणा स्थित रियल एस्टेट कंपनी मेसर्स बीपीटीपी लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स बिजनेस पार्क टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड) के खिलाफ फेमा उल्लंघन की जांच के सिलसिले में की है।ईडी के अनुसार, बीपीटीपी लिमिटेड के कार्यालयों और इसके चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक काबुल चावला और पूर्णकालिक निदेशक सुधांशु त्रिपाठी के आवासों पर तलाशी अभियान चलाया गया। यह जांच फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के तहत शुरू की गई है। जानकारी मिली थी कि बीपीटीपी लिमिटेड ने मॉरीशस की कंपनियों से 500 करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया, जो फेमा नियमों का उल्लंघन है।
जांच में पता चला है कि कंपनी ने मॉरीशस की सीपीआई इंडिया लिमिटेड से 322.5 करोड़ रुपए और हार्बर विक्टोरिया इन्वेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड से 215 करोड़ रुपए की एफडीआई प्राप्त की। ईडी की जांच से पता चला कि 2007-08 में स्वचालित मार्ग से ये निवेश किए गए थे, जिसमें 'पुट/स्वैप' विकल्प शामिल थे। ये विकल्प विदेशी निवेशकों को निकासी पर गारंटीड रिटर्न देते थे, जो उस समय के फेमा नियमों का उल्लंघन था। तलाशी के दौरान बैंक लॉकरों को फ्रीज किया गया और महत्वपूर्ण दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों को जब्त किया गया। इन दस्तावेजों से पता चला कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद (जिसमें शेयरधारक समझौते में संशोधन कर 'पुट ऑप्शन' खंड को हटाने को कहा गया था) बीपीटीपी लिमिटेड ने इसका पालन नहीं किया, जिससे फेमा और एफडीआई नियमों का उल्लंघन हुआ।जांच में यह भी सामने आया कि काबुल चावला कई विदेशी संस्थाओं के लाभकारी मालिक हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल न्यूयॉर्क, अमेरिका में एक महंगी अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था। इन विदेशी संस्थाओं, विदेशी संपत्ति और इसके लिए उपयोग किए गए धन के स्रोत की भी अब फेमा जांच के तहत जांच की जा रही है।
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