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जींद के प्राइमरी स्कूल में समय से पहले छुट्टी, शिक्षक पर नशे में होने का आरोप

nidhi
25 Oct 2026 9:39 AM IST
जींद के प्राइमरी स्कूल में समय से पहले छुट्टी, शिक्षक पर नशे में होने का आरोप
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जींद: हरियाणा के जींद जिले के सफीदों क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने और निर्धारित समय से पहले विद्यार्थियों की छुट्टी करने का आरोप लगा है। मामला गांव खरखड़ा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला का है। ग्रामीणों ने शिक्षक का वीडियो बनाकर अधिकारियों को भेजा है। सरपंच की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है। आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी।
गांव के सरपंच निरवेल सिंह के अनुसार, पांचवीं कक्षा पढ़ाने वाला शिक्षक राजेश कुमार शनिवार सुबह कथित तौर पर नशे में स्कूल आया था। आरोप है कि उसने करीब साढ़े 11 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक खुद को ठीक से संभाल नहीं पा रहा था। सरपंच ने सफीदों के एसडीएम पुलकित मल्होत्रा और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी है। खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश मलिक ने बताया कि उन्हें शिक्षक का वीडियो मिला है। विद्यार्थियों और अन्य शिक्षकों से बातचीत करके जानकारी जुटाई जाएगी। सरपंच ने पहले भी शिक्षक के नशे में आने का आरोप लगाया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध विवरण में शिक्षक का पक्ष, चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट अथवा निलंबन का आदेश सामने नहीं आया है।
इस शिकायत में दो विषय महत्वपूर्ण हैं। पहला, शिक्षक के कथित तौर पर नशे की स्थिति में विद्यालय पहुंचने का आरोप और दूसरा, बच्चों को निर्धारित समय से पहले घर भेजने का दावा। दोनों की अलग-अलग पड़ताल आवश्यक है। शिक्षक की उस दिन की स्थिति के साथ यह स्पष्ट होना चाहिए कि छुट्टी किस समय हुई, उसका निर्णय किसने लिया और क्या विद्यालय के अन्य जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी थी।
प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की दिनचर्या शिक्षक और स्कूल प्रबंधन की निगरानी में चलती है। अभिभावक एक निश्चित समय के लिए बच्चों को विद्यालय भेजते हैं और उसी के अनुसार उन्हें वापस लाने अथवा घर पर उनकी देखभाल की व्यवस्था करते हैं। बिना पूर्व सूचना समय बदलने से यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय से पहले छुट्टी का आरोप केवल पढ़ाई के घंटों तक सीमित विषय नहीं है। छोटे बच्चों के मामले में स्कूल से घर लौटने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। कुछ बच्चे परिवार के सदस्य के साथ जाते हैं, जबकि कुछ समूह में या तय वाहन से लौटते हैं। अचानक छुट्टी होने पर अभिभावकों को सूचना देना और बच्चों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस घटना में किसी बच्चे के रास्ते में असुरक्षित होने की पुष्टि नहीं है, लेकिन शिकायत की पड़ताल में छुट्टी की व्यवस्था स्पष्ट करना उपयोगी होगा।
शिक्षक के व्यवहार से जुड़ी शिकायत में वीडियो एक शुरुआती सामग्री हो सकता है। उसके साथ घटनाक्रम, मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी और संबंधित शिक्षक का जवाब भी महत्वपूर्ण हैं। किसी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति देखकर लगाए गए आरोप और उसकी औपचारिक पुष्टि में अंतर रहता है। इसीलिए जांच का उद्देश्य केवल वीडियो देखना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों को आपस में मिलाकर घटना की सही तस्वीर सामने लाना होना चाहिए।
विद्यार्थियों से जानकारी लेते समय भी संवेदनशीलता आवश्यक है। छोटे बच्चों से एक ही बात बार-बार पूछना या उन्हें किसी विशेष उत्तर की ओर ले जाना उचित नहीं होगा। उनसे सरल भाषा में उस दिन की गतिविधियों और छुट्टी के समय के बारे में पूछा जा सकता है। बच्चों की पहचान और निजता का ध्यान रखते हुए जानकारी जुटाने से पढ़ाई के वातावरण पर अनावश्यक दबाव पड़ने से बचाया जा सकता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ अनुशासन और भरोसे का वातावरण बनाए रखना भी है। अभिभावक विद्यालय पर यह विश्वास करके बच्चों को भेजते हैं कि वहां उनकी देखभाल होगी और पढ़ाई नियमित चलेगी। ऐसी शिकायत सामने आने पर तथ्य स्पष्ट करना इसी भरोसे से जुड़ा होता है। साथ ही किसी आरोप को पूरे विद्यालय या सभी शिक्षकों के आचरण का प्रमाण मानना भी उचित नहीं होगा।
पहले की शिकायतों का उल्लेख होने पर उनके रिकॉर्ड की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। शिकायत कब दी गई, किस अधिकारी को मिली और उस पर क्या जवाब आया—इन प्रश्नों से जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है। केवल पुराने आरोप दोहराने से उनकी पुष्टि नहीं होती। इसी तरह वर्तमान शिकायत की जांच को पहले के अपुष्ट दावों से प्रभावित किए बिना उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है।शिक्षा विभाग के सामने फिलहाल शिकायत की निष्पक्ष पड़ताल और बच्चों की पढ़ाई नियमित रखने की जिम्मेदारी है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित प्राधिकारी विभागीय प्रक्रिया के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। वहीं, शिक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना भी जरूरी है। अभी मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच से स्पष्ट होगा कि शनिवार को स्कूल में क्या हुआ और समय से पहले छुट्टी किए जाने के आरोप में किसकी भूमिका थी।
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