
गुरुग्राम। दिल्ली से सटी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच अब एक बार फिर कॉलोनी का सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत किया जाएगा। सर्वे में मौके की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि कॉलोनी में कहां-कहां सीवर और पेयजल की लाइनें मौजूद हैं, किन हिस्सों में सड़कें बनी हुई हैं और जमीन पर मौजूदा स्थिति क्या है।
दुर्गा बिल्डर कॉलोनी का मामला वर्ष 2013 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहे इस मामले में अब सर्वे को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उन प्लाटधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें बिल्डर की ओर से प्लाट नहीं दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर होगा सर्वे
जिला नगर योजनाकार एन्फोर्समेंट यजन चौधरी के अनुसार, दुर्गा बिल्डर कॉलोनी से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में ओखला एनक्लेव प्लाट होल्डर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर विचाराधीन है। इसी मामले में अदालत के निर्देशों के तहत कॉलोनी की मौजूदा स्थिति का सर्वे किया जाना है।
सर्वे के दौरान जमीन पर मौजूद निर्माण, सड़क, सीवर और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति दर्ज की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कॉलोनी के लेआउट प्लान और मौके की वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है।
अधिकारियों के मुताबिक सर्वे से मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और कॉलोनी के लेआउट से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
18 मई के आदेश में लेआउट प्लान दोबारा बनाने के निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। आदेश में कॉलोनी का लेआउट प्लान दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मौके से अतिक्रमण हटाने और हकदार प्लाटधारकों को राहत देने की बात कही गई है।
अदालत के निर्देशों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सर्वे को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
लेआउट प्लान दोबारा तैयार होने से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कॉलोनी में कौन सा प्लाट किस स्थिति में है और किन प्लाटधारकों के दावे पर विचार किया जाना है। इसके साथ ही मौके पर मौजूद अतिक्रमण और अन्य निर्माण की स्थिति भी सामने आएगी।
वर्षों से न्याय की उम्मीद में प्लाटधारक
दुर्गा बिल्डर कॉलोनी से जुड़े प्लाटधारक लंबे समय से अपने अधिकारों और प्लाट मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। आरोप है कि कई प्लाटधारकों को बिल्डर की ओर से उनके प्लाट उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसे लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश राहत की उम्मीद लेकर आया है।
प्लाटधारकों का मामला वर्ष 2013 से न्यायिक प्रक्रिया में है। इतने लंबे समय से मामला लंबित होने के कारण संबंधित लोगों के लिए यह विवाद काफी महत्वपूर्ण बना हुआ है। अब दोबारा सर्वे और लेआउट प्लान तैयार किए जाने की प्रक्रिया से उन्हें अपने दावों के समाधान की उम्मीद है।
सीवर और पेयजल व्यवस्था की भी होगी जांच
सर्वे में कॉलोनी की बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों की टीम यह दर्ज करेगी कि किन हिस्सों में सीवर लाइन मौजूद है और कहां पेयजल की लाइन बिछी हुई है।
इसके साथ ही कॉलोनी में बनी सड़कों की स्थिति भी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मौजूदा समय में कॉलोनी किस तरह विकसित है और मूल लेआउट से इसकी स्थिति कितनी अलग है।
सीवर, पेयजल और सड़क जैसी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी कॉलोनी के नियोजन और विकास की स्थिति का आकलन इन्हीं आधारभूत सुविधाओं से किया जा सकता है।
अतिक्रमण हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 18 मई के आदेश में मौके से अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में सर्वे के दौरान अतिक्रमण की स्थिति को चिह्नित किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
सर्वे के बाद प्रशासन को यह पता चल सकेगा कि कॉलोनी के किन हिस्सों में अतिक्रमण है और कहां निर्माण मूल योजना के अनुरूप नहीं है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उद्देश्य कॉलोनी की जमीन और लेआउट को व्यवस्थित करना है, ताकि हकदार प्लाटधारकों को उनके अधिकार के अनुरूप राहत दी जा सके।
दोबारा तैयार होगा कॉलोनी का लेआउट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कॉलोनी का लेआउट प्लान दोबारा तैयार किया जाना है। इसके लिए मौके की वास्तविक स्थिति की जानकारी जरूरी है। यही वजह है कि सर्वे को इस पूरी प्रक्रिया की बुनियाद माना जा रहा है।
सर्वे में प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रशासनिक अधिकारी कॉलोनी के मौजूदा स्वरूप का आकलन करेंगे। इसके बाद लेआउट प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
प्लाटधारकों को राहत मिलने की उम्मीद
लंबे समय से चल रहे इस विवाद में सबसे ज्यादा उम्मीद उन प्लाटधारकों को है, जिन्हें अब तक उनके प्लाट नहीं मिल सके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हकदार प्लाटधारकों को राहत देने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सर्वे के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद संबंधित प्लाटधारकों के दावों पर आगे कार्रवाई की जा सकेगी। इससे वर्षों से अपने अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
दुर्गा बिल्डर कॉलोनी का मामला करीब 13 वर्षों से अदालत में चल रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर होने वाला नया सर्वे न केवल कॉलोनी की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करेगा, बल्कि लेआउट प्लान को दोबारा तैयार करने, अतिक्रमण हटाने और हकदार प्लाटधारकों को राहत देने की प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभा सकता है।





