
सोनीपत: दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय डीसीआरयूएसटी, मुरथल में विश्व उद्यमिता दिवस पर आयोजित व्याख्यान में कुलगुरु प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि उद्यमिता देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक मजबूत साधन है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता से युवाओं को रोजगार, नेतृत्व और नवाचार के अवसर मिलते हैं।
गुरुवार को कुलगुरु ने कहा कि भारत जैसे युवा प्रधान देश में उद्यमिता विकास की कुंजी है। स्टार्टअप और छोटे-मध्यम उद्योग स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता घटती है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएं इसी दिशा में कदम हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डिजिटल स्टार्टअप जैसे पेटीएम, ओला और जोमैटो ने शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण भारत में भी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। इससे समावेशी विकास और क्षेत्रीय असमानताएं कम होती हैं।
प्रो. सिंह ने कहा कि उद्यमिता केवल आर्थिक विकास नहीं करती, बल्कि नवाचार को भी प्रोत्साहित करती है। भारत की आईटी और बायोटेक कंपनियां इसका उदाहरण हैं, जो वैश्विक स्तर पर देश की पहचान मजबूत कर रही हैं। युवाओं के लिए यह अपनी रचनात्मकता और विचारों को मूर्त रूप देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि एंत्रप्रन्योरशिप युवाओं को स्वरोजगार दिलाने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार उत्पन्न करती है। सरकार की योजनाएं जैसे स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना और स्किल इंडिया उन्हें वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय भी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। विद्यार्थी यदि अपना विचार लेकर आएंगे, तो उन्हें हर संभव सहायता दी जाएगी। उद्यमिता युवाओं में नेतृत्व क्षमता, जोखिम उठाने का साहस और आत्मविश्वास बढ़ाती है। साथ ही यह पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सामाजिक समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा उद्यमिता को अपनाएं तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर नेतृत्वकारी शक्ति के रूप में उभरेगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अश्वनी अग्रवाल ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में रजिस्ट्रार डॉ. अजय गर्ग, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी प्रो. सुरेश वर्मा और प्रो. विजय शर्मा सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे।





