
Hisar हिसार में ‘शगुन योजना’ में दस्तावेज़ हेराफेरी
हिसार जिले में ‘शगुन योजना’ के तहत लाभार्थियों को मिलने वाले सरकारी सहायता पैकेज में दस्तावेज़ हेराफेरी की घटनाएँ सामने आई हैं। यह योजना मुख्य रूप से माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और अन्य कल्याण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के लिए चलाई जाती है। योजना के तहत पात्र परिवारों को वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य सेवाएँ और पोषण संबंधी सुविधाएँ दी जाती हैं।
स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोग लाभ पाने के लिए PPP (Public-Private Partnership) दस्तावेज़ों में गड़बड़ी कर रहे हैं। इस हेराफेरी में लाभार्थियों के पहचान पत्रों, जन्म प्रमाण पत्रों और आय संबंधी दस्तावेज़ों को बदलकर या नकली रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस तरह की कार्रवाई से योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है और असली जरूरतमंद परिवारों तक सहायता नहीं पहुँच पाती।
विशेषज्ञों का कहना है कि दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने वाले अक्सर परिवार के वास्तविक विवरण बदल देते हैं, जैसे आय स्तर कम दिखाना या परिवार में सदस्यों की संख्या बदलना। इससे उन्हें योजना का लाभ गलत तरीके से मिल जाता है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि योजना की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। स्थानीय प्रशासन ने इस पर ध्यान देते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने लाभार्थियों की सूची और जमा किए गए दस्तावेज़ों की क्रॉस-चेकिंग का आदेश दिया है। साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। उनका मानना है कि समय पर कार्रवाई और कड़ी निगरानी से इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन और आधार आधारित पंजीकरण जैसे उपाय अपनाए जाएँ। इससे नकली दस्तावेज़ों की पहचान आसान होगी और योजना का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुँचेगा। इसके अलावा, लोगों को योजना के सही उपयोग और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। हिसार में सामने आई यह घटना एक चेतावनी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए धोखाधड़ी और हेराफेरी करने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी की जरूरत है। सही और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने से ही योजना का उद्देश्य पूरा हो सकता है और असली जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता पहुँच सकती है।





