हरियाणा

DNA टेस्ट से खुला रितु हत्याकांड का राज पति समेत दो को उम्रकैद

nidhi
18 Aug 2026 10:08 AM IST
DNA टेस्ट से खुला रितु हत्याकांड का राज पति समेत दो को उम्रकैद
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पत्नी की हत्या मामले में पति दोषी उम्रकैद की सजा सुनाई
पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले के चर्चित रितु हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतका के पति शंकर और उसके साथी मोनू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में डीएनए जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पुलिस की जांच को मजबूत आधार दिया, जिसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई।
मामला पानीपत के सौदापुर गांव से जुड़ा है, जहां रितु की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि रितु की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उसकी हत्या की गई थी। जांच आगे बढ़ने पर पति शंकर और उसके साथी मोनू की भूमिका सामने आई।
पुलिस के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने मामले को छिपाने की कोशिश की थी। शुरुआत में हत्या की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए चुनौती थी, लेकिन जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। डीएनए टेस्ट रिपोर्ट इस केस में अहम कड़ी साबित हुई।
जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से मिले सबूत, फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में मजबूत पक्ष रखा। डीएनए जांच से मिले सुरागों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती दी और अदालत में आरोप साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने हत्या से जुड़े साक्ष्य और गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने शंकर और मोनू को दोषी पाया और दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इस मामले में पति की भूमिका सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही। रिश्तों को शर्मसार करने वाली इस वारदात में एक महिला की जान चली गई और जांच के दौरान पति ही मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल अब आपराधिक मामलों की जांच में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। डीएनए टेस्ट जैसे वैज्ञानिक तरीकों से कई ऐसे मामलों की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलती है, जिनमें सामान्य जांच से सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल होता है।
पानीपत का यह मामला भी इस बात का उदाहरण है कि अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, वैज्ञानिक जांच और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोषियों तक पहुंचा जा सकता है। अदालत के फैसले के बाद पुलिस की जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
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