हरियाणा

US–ईरान तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर

Kavita2
21 May 2026 4:25 PM IST
US–ईरान तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर
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Haryana हरियाणा: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है, जिसका सीधा प्रभाव पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है। बीते कुछ समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ता के साथ-साथ किसानों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

नगर के बाईपास स्थित इंडियन ऑयल पंप संचालकों के अनुसार पिछले लगभग दो सप्ताह के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव के बाद राजस्थान और हरियाणा के बीच कीमतों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि राजस्थान के मुकाबले हरियाणा में डीजल करीब 5 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल करीब 10 रुपये प्रति लीटर सस्ता मिल रहा है। इस अंतर ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन खरीद के पैटर्न को प्रभावित किया है।

कीमतों के इस अंतर का सीधा असर राजस्थान से लगे क्षेत्रों में देखा जा रहा है। स्थानीय लोग, खासकर किसान और वाहन चालक, अब ईंधन खरीदने के लिए हरियाणा की ओर रुख कर रहे हैं। किसानों के लिए डीजल की लागत खेती की उत्पादन लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है, ऐसे में कीमतों में अंतर उनके खर्चों पर सीधा असर डाल रहा है। वहीं परिवहन से जुड़े लोग भी सस्ते ईंधन की तलाश में सीमा पार कर रहे हैं।

स्थानीय पंप संचालकों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में यह अंतर लगातार ग्राहकों के व्यवहार को बदल रहा है। पहले जहां अधिकांश लोग अपने नजदीकी पंप से ही ईंधन भरवाते थे, वहीं अब कीमतों के अंतर के कारण लंबी दूरी तय कर सस्ता ईंधन खरीदने का चलन बढ़ रहा है। इससे स्थानीय पंपों की बिक्री पर भी असर देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल बाजार में अस्थिरता का कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इसका प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में ईंधन की खुदरा कीमतों पर भी दिखाई देता है। हालांकि कीमतों का निर्धारण राज्य करों और अन्य शुल्कों के आधार पर अलग-अलग राज्यों में भिन्न होता है, जिसके कारण राजस्थान और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में अंतर पैदा हो जाता है।

स्थानीय स्तर पर इस स्थिति ने आम लोगों की बजट योजना को भी प्रभावित किया है। किसान वर्ग का कहना है कि डीजल की बढ़ती लागत से खेती की लागत बढ़ रही है, जिससे उनकी आय पर असर पड़ रहा है। वहीं वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन के लिए अतिरिक्त दूरी तय करना समय और पैसे दोनों की बर्बादी है, लेकिन मजबूरी में सस्ता विकल्प चुनना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तनाव से उत्पन्न बाजार अस्थिरता और राज्यों के बीच कर संरचना के अंतर ने मिलकर ईंधन की कीमतों में अंतर पैदा किया है, जिसका सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे रहा है।

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