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मिड डे मील पर डिजिटल निगरानी शुरू

Kavita2
27 Aug 2026 12:31 PM IST
मिड डे मील पर डिजिटल निगरानी शुरू
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नारनौल। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील यानी पीएम पोषण योजना में विद्यार्थियों की संख्या को लेकर होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। शिक्षा निदेशालय ने पीएम पोषण योजना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विद्यार्थियों की दैनिक हाजिरी की तीन स्तरों पर जांच के निर्देश जारी किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति स्कूल रजिस्टर, पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। तीनों माध्यमों में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या में अंतर पाया गया तो इसकी जिम्मेदारी विद्यालय मुखिया की तय की जाएगी।

शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि मिड-डे-मील योजना में वास्तविक विद्यार्थियों के आधार पर ही भोजन तैयार किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके। कई बार स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर दिखाने या रिकॉर्ड में अंतर की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई डिजिटल व्यवस्था से ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

नई प्रक्रिया के अनुसार, कक्षा अध्यापक को प्रतिदिन अपनी कक्षा के विद्यार्थियों की हाजिरी लेनी होगी। इसके बाद उपस्थित बच्चों की संख्या मिड-डे-मील इंचार्ज को उपलब्ध कराई जाएगी। कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर के बाद मिड-डे-मील इंचार्ज संबंधित रजिस्टर में कुल विद्यार्थियों की संख्या दर्ज करेगा।

इसके बाद इस रिकॉर्ड पर विद्यालय मुखिया यानी प्रधानाचार्य या मुख्य शिक्षक के हस्ताक्षर कराए जाएंगे। विद्यालय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दर्ज की गई संख्या और वास्तविक उपस्थिति में कोई अंतर न हो।

इसी प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर पीएम पोषण एप पर विद्यार्थियों की संख्या अपडेट की जाएगी। इसके अलावा एमआईएस पोर्टल पर प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इससे विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि कौन सा विद्यार्थी स्कूल में उपस्थित था और कितने बच्चों के लिए भोजन तैयार किया गया।

शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि तीनों रिकॉर्ड में समानता होना जरूरी होगा। यदि स्कूल रजिस्टर, पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल में अलग-अलग आंकड़े पाए जाते हैं तो संबंधित विद्यालय प्रमुख के खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल निगरानी से योजना के संचालन में पारदर्शिता आएगी। साथ ही सरकारी धन के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित किया जा सकेगा। पीएम पोषण योजना के तहत सरकार बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी उपस्थिति बढ़ाने और पोषण स्तर सुधारने में मदद मिलती है।

नई व्यवस्था से शिक्षा विभाग को स्कूलों की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण जिला और राज्य स्तर के अधिकारी भी विद्यार्थियों की उपस्थिति और योजना की प्रगति की निगरानी कर पाएंगे।

शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे नई व्यवस्था का सख्ती से पालन करें। शिक्षकों और मिड-डे-मील से जुड़े कर्मचारियों को भी रिकॉर्ड अपडेट करने में सावधानी बरतने को कहा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होती हैं। विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या के आधार पर भोजन वितरण होने से योजना का लाभ सही बच्चों तक पहुंच सकेगा।

सरकार पहले भी कई योजनाओं में डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू कर चुकी है। पीएम पोषण योजना में यह बदलाव भी उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

फिलहाल शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को नई व्यवस्था के अनुसार काम करने के निर्देश दे दिए हैं। आने वाले समय में इसके प्रभाव की समीक्षा भी की जाएगी।

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