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हाईकोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा के गेस्ट टीचर्स को नियमित करने की मांग तेज

Ratna Netam
6 Aug 2026 8:51 PM IST
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा के गेस्ट टीचर्स को नियमित करने की मांग तेज
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चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों से जुड़े लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की ओर से दायर लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) का निपटारा कर दिया है। 6 अगस्त को आए इस निर्णय के बाद राज्यभर के हजारों अतिथि शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे गेस्ट टीचरों का मानना है कि अब उनके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो सकती है और सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस निर्णय ले सकती है।
हरियाणा में पिछले कई वर्षों से हजारों गेस्ट टीचर सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन स्थायी नियुक्ति नहीं मिलने के कारण वे लगातार नौकरी की असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता का सामना कर रहे हैं। नियमितीकरण की मांग को लेकर शिक्षक संगठन समय-समय पर आंदोलन, प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई भी लड़ते रहे हैं।
इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा इस मामले में दायर लेटर्स पेटेंट अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। अब अदालत द्वारा इस अपील का निपटारा किए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। इस फैसले को गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से लंबित कानूनी बाधा अब काफी हद तक समाप्त होती दिखाई दे रही है।
शिक्षक संगठनों ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे गेस्ट टीचरों को अब स्थायी नियुक्ति मिलने का रास्ता और अधिक साफ हो गया है। संगठनों का मानना है कि सरकार को अब बिना किसी अनावश्यक देरी के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों को स्थायी रोजगार की सुरक्षा मिल सके।
गेस्ट टीचरों का कहना है कि वे लंबे समय से कम वेतन और अस्थायी सेवा शर्तों के बावजूद पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। कई शिक्षक एक दशक से भी अधिक समय से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत हैं, लेकिन आज भी उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि अनुभवी गेस्ट टीचरों का नियमितीकरण केवल कर्मचारियों के हित में ही नहीं होगा, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी मजबूती मिलेगी। वर्षों से कार्यरत शिक्षकों का अनुभव विद्यार्थियों के बेहतर शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि इन शिक्षकों को स्थायी सेवा का लाभ मिलता है तो शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता भी आएगी।
हालांकि, अदालत के फैसले के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की मानी जा रही है। सरकार को यह तय करना होगा कि नियमितीकरण की प्रक्रिया किस प्रकार और किन शर्तों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द स्पष्ट नीति जारी करे, ताकि लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो सके।
गौरतलब है कि हरियाणा में गेस्ट टीचरों का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न सरकारों के दौरान इस संबंध में कई घोषणाएं और आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ पाया। ऐसे में हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने इस पूरे मामले को फिर से केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल राज्य के करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों की निगाहें अब हरियाणा सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार जल्द नियमितीकरण को लेकर नीति बनाती है तो यह हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। वहीं शिक्षा विभाग के लिए भी यह अवसर होगा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों को स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाकर सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता को और मजबूत किया जाए। अब देखना होगा कि अदालत के इस फैसले के बाद सरकार कितनी तेजी से आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करती है और गेस्ट टीचरों की वर्षों पुरानी मांग को कितना जल्द पूरा कर पाती है।
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