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महेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय, नारनौल जिला बनाने की मांग तेज

Kavita2
3 Aug 2026 2:15 PM IST
महेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय, नारनौल जिला बनाने की मांग तेज
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महेंद्रगढ़ : क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाने और नारनौल को अलग जिला घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। रविवार को क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम एक लिखित पत्र भेजकर अपनी मांग को दोहराया। संगठनों का कहना है कि प्रदेश सरकार हरियाणा में नए जिलों के गठन की दिशा में विचार कर रही है, ऐसे में महेंद्रगढ़ और नारनौल क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।

सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पत्र में कहा कि महेंद्रगढ़ जिले का क्षेत्रफल काफी बड़ा है और प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सरकारी कामकाज, प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी मामलों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाया जाता है तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चल रही प्रक्रिया में महेंद्रगढ़ क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, प्रशासनिक जरूरतों और लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि महेंद्रगढ़ ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां जिला मुख्यालय बनने की सभी आवश्यक संभावनाएं मौजूद हैं।

वहीं, नारनौल को अलग जिला बनाने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। संगठनों का तर्क है कि नारनौल क्षेत्र की अपनी अलग पहचान, ऐतिहासिक महत्व और प्रशासनिक आवश्यकताएं हैं। अलग जिला बनने से यहां विकास कार्यों को गति मिलेगी और लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

सामाजिक संगठनों ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश में करीब एक दर्जन नए जिले बनाने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे समय में महेंद्रगढ़ और नारनौल को लेकर उठाई जा रही मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सरकार जनभावनाओं को देखते हुए इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी।

पत्र में संगठनों ने यह भी उल्लेख किया कि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से विकास की गति तेज होती है। नए जिलों के गठन से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और आम नागरिकों को अपने कामों के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्र होने से अधिकारियों की निगरानी बढ़ती है और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि महेंद्रगढ़ और नारनौल को लेकर उठ रही मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि आम जनता की सुविधा और क्षेत्र के विकास से जुड़ी हुई है। लंबे समय से लोग इस मांग को लेकर विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। अब प्रदेश में नए जिलों के गठन की चर्चा के बीच इस मांग को फिर से बल मिला है।

संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि सरकार एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन करवाए और जनहित में उचित निर्णय ले। उनका कहना है कि यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है तो यह दक्षिण हरियाणा के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अब सभी की नजरें प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सामाजिक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार नए जिलों के गठन की प्रक्रिया में महेंद्रगढ़ और नारनौल क्षेत्र की मांग को शामिल कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दे सकती है।

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