हरियाणा

दाह संस्कार के बाद तेरहवीं में भी नदारद रहीं बेटियां

Ratna Netam
16 Aug 2026 6:32 PM IST
दाह संस्कार के बाद तेरहवीं में भी नदारद रहीं बेटियां
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सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में वृद्धाश्रम में रहने वाले कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की तेरहवीं की रस्म रविवार को शहर के गीता मंदिर में पूरी श्रद्धा और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई। मंदिर में हवन-यज्ञ कराया गया, उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई और कार्यक्रम के बाद उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित किया गया। हालांकि दाह संस्कार और अस्थि विसर्जन की तरह तेरहवीं में भी उनकी तीनों बेटियां उपस्थित नहीं हुईं।
गीता मंदिर में सुबह से ही कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई थीं। मंदिर परिसर में शिवचरण गुप्ता की बड़ी तस्वीर लगाई गई थी। स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों, सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों और कुछ स्थानीय नेताओं ने उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाए। पंडितों ने वैदिक मंत्रों के बीच हवन संपन्न कराया और मृत्यु के तेरहवें दिन किए जाने वाले संस्कार पूरे कराए।
आयोजन के दौरान वातावरण शांत और गरिमापूर्ण रहा। वृद्धाश्रम के प्रबंधन और स्थानीय समाजसेवियों ने कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली। शिवचरण के परिवार के सदस्यों की सीमित मौजूदगी और विशेष रूप से उनकी बेटियों की अनुपस्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण गुप्ता की सभी अंतिम क्रियाएं हिंदू परंपराओं के अनुसार कराई गई हैं। उनके अनुसार, तीनों बेटियों से तेरहवीं के कार्यक्रम से पहले संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शामिल होने में असमर्थता जताई। आनंद कुमार ने बताया कि दाह संस्कार के दौरान बेटियों से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत हुई थी। हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के समय भी उनसे व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया गया था।
शिवचरण गुप्ता की अस्थियां उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने हरिद्वार में विसर्जित की थीं। इस घटना का एक भावुक पहलू यह भी है कि महेंद्र को करीब दस वर्षों से अपने भाई के जीवित होने की जानकारी नहीं थी। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद संपर्क नहीं होने के कारण परिवार ने मान लिया था कि शिवचरण की मौत हो चुकी है। परिवार ने उस समय उनका शोक भी मना लिया था।
काफी समय बाद सोशल मीडिया के माध्यम से महेंद्र को जानकारी मिली कि उनके भाई जीवित हैं और सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। शिवचरण की मृत्यु के बाद महेंद्र आगे आए और उन्होंने समाजसेवियों के साथ मिलकर अस्थि विसर्जन सहित आवश्यक धार्मिक रस्में निभाईं।
बताया गया है कि बेटियों से दोबारा संपर्क किए जाने पर बड़ी बेटी ने पिता के प्रति गहरा स्नेह होने की बात कही थी। उन्होंने व्यक्तिगत परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण हरिद्वार नहीं पहुंच पाने की बात कही। तीनों बेटियों ने अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन को सौंप दी थी।
इस घटना ने बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक रिश्तों और वृद्धाश्रमों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बेटियों की अनुपस्थिति को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनकी पूरी परिस्थितियां सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई हैं। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या संबंधित लोगों को दोषी ठहराने से पहले उनका विस्तृत पक्ष जानना भी जरूरी है।
शिवचरण गुप्ता की अंतिम यात्रा से लेकर तेरहवीं तक वृद्धाश्रम प्रबंधन, उनके भाई और स्थानीय समाजसेवियों ने सभी जिम्मेदारियां निभाईं। गीता मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ उनकी अंतिम धार्मिक रस्में पूरी हो गईं।
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