हरियाणा

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से संकट गहराया, दूसरे दिन भी विरोध जारी

Kavita2
23 Oct 2026 3:55 PM IST
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से संकट गहराया, दूसरे दिन भी विरोध जारी
x

चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दूसरे दिन भी जारी रही। इस आंदोलन के कारण राज्य के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। वहीं, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताली कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने के लिए तैयार है।

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 22 अक्टूबर से शुरू हुई यह हड़ताल 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। कर्मचारी संगठनों का विरोध हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ है।

40 हजार कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली व्यवस्था प्रभावित

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, इस आंदोलन में लगभग 40 हजार बिजली कर्मचारी और इंजीनियर शामिल हुए हैं। हड़ताल का असर राज्य के विभिन्न जिलों में देखने को मिला है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने और तकनीकी खराबियों की शिकायतों के समाधान में देरी की खबरें सामने आई हैं।

बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम उपभोक्ताओं के साथ औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि हड़ताल के कारण पानी की आपूर्ति और औद्योगिक उत्पादन जैसी आवश्यक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।

हड़ताल के दौरान बिजली वितरण से संबंधित शिकायतों का निपटारा प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के उपाय किए हैं।

25 साल के लिए निजी कंपनी को मिला लाइसेंस

विवाद की शुरुआत 19 अक्टूबर को हुई, जब HERC ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया।

यह अनुमति बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत दी गई है। इसके अंतर्गत निजी कंपनी को मौजूदा सरकारी वितरण कंपनियों के साथ संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति करने का अवसर मिल सकता है।

इस फैसले के बाद कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति देना सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में कदम है।

संगठनों का यह भी कहना है कि यदि अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में निजी कंपनियों को प्रवेश मिलता है, तो सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ये कर्मचारी संगठनों की आशंकाएं हैं और निजी लाइसेंस के वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन अलग से करना होगा।

अनिल विज बोले- बातचीत से निकलेगा समाधान

हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को हड़ताली कर्मचारियों से आंदोलन समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को समझ रही है और समाधान के लिए विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

विज के अनुसार, इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी बातचीत हो चुकी है। उन्होंने शुक्रवार दोपहर तीन बजे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक निर्धारित होने की जानकारी दी।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि विवाद का समाधान लगभग तैयार है और सरकार चाहती है कि कर्मचारी जल्द काम पर लौटें, ताकि आम जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

बिजली अधिनियम की धारा 108 का विकल्प

राज्य सरकार इस विवाद के समाधान के लिए बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के इस्तेमाल पर भी विचार कर रही है।

इस प्रावधान के तहत राज्य सरकार सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य बिजली नियामक आयोग को निर्देश दे सकती है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने संकेत दिया कि इस कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करके निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने से संबंधित विवाद का समाधान तलाशा जाएगा।

हालांकि, धारा 108 के इस्तेमाल से आयोग के आदेश में क्या बदलाव होगा, यह आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

सरकार नियामक आयोग के फैसले को देगी चुनौती

हरियाणा सरकार ने निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के फैसले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देने की भी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार बिजली कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और उनके पक्ष को उचित कानूनी मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करेगी।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज के अनुसार, बिजली विभाग ने लाइसेंस देने के प्रस्ताव का नियामक आयोग के समक्ष पहले ही विरोध किया था। इसके बावजूद आयोग ने निजी कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया।

सरकार अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आदेश पर रोक प्राप्त करने का प्रयास करेगी।

कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण पर उठाए सवाल

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकारी बिजली वितरण कंपनियां लंबे समय से प्रदेश में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

संगठनों के अनुसार, गुरुग्राम जैसे औद्योगिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस दिए जाने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सरकार से लाइसेंस संबंधी आदेश को वापस लेने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

वहीं, सरकार का कहना है कि बिजली नियामक आयोग एक वैधानिक संस्था है और उसके फैसले के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

अधिकारियों की छुट्टियां रद्द, वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर जोर

तीन दिवसीय हड़ताल को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करने सहित आवश्यक कदम उठाए हैं।

इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति को यथासंभव सामान्य बनाए रखना और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

विशेष रूप से अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति केंद्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं को बिजली उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार के सामने एक ओर कर्मचारी संगठनों की मांगों का समाधान निकालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर लाखों बिजली उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी है।

24 अक्टूबर तक प्रस्तावित है हड़ताल

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया था। संगठन ने चेतावनी दी थी कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगे के आंदोलन पर भी विचार किया जा सकता है।

शुक्रवार को सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच प्रस्तावित बातचीत को इस विवाद के समाधान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल बैठक के अंतिम परिणाम और हड़ताल समाप्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार के कानूनी एवं प्रशासनिक आश्वासन के बाद कर्मचारी संगठन आंदोलन वापस लेने का फैसला करते हैं या अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखते हैं।

Next Story