
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने 'ड्रग-मुक्त हरियाणा' अभियान के तहत युवाओं के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों की निगरानी बढ़ा दी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने न्यूट्रास्युटिकल्स, प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स की गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। विभागीय कार्रवाई से संबंधित जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 61 स्थानों पर छापेमारी कर कुल 73 नमूने एकत्र किए गए हैं। इन उत्पादों को फिटनेस, ताकत और ऊर्जा बढ़ाने के नाम पर बेचा जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और लेबल पर किए गए दावों की जांच करना है। विक्रेताओं को नाबालिगों और गर्भवती महिलाओं के मामले में विशेष सावधानी बरतने तथा बिना चिकित्सकीय सलाह ऐसे उत्पाद न बेचने की चेतावनी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
61 स्थानों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की छापेमारी
प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने विशेष अभियान के तहत न्यूट्रास्युटिकल्स और फिटनेस से संबंधित उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जांच शुरू की है।
इस कार्रवाई में 61 स्थानों का निरीक्षण करने और 73 नमूने एकत्र करने की जानकारी दी गई है।
विभाग का ध्यान उन उत्पादों पर केंद्रित है, जिन्हें प्राकृतिक, स्वास्थ्यवर्धक और ऊर्जा बढ़ाने वाला बताकर बेचा जाता है।
जांच के दौरान उत्पादों की गुणवत्ता और उनसे जुड़े दावों की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, इस विशेष अभियान के 61 निरीक्षणों और 73 नमूनों का जिलेवार विवरण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है। इससे संबंधित विस्तृत सरकारी रिपोर्ट सामने आने पर कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स की जांच
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अभियान में प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
फिटनेस और व्यायाम से जुड़े लोगों के बीच प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं एनर्जी ड्रिंक्स का प्रचार अक्सर सतर्कता और ऊर्जा बढ़ाने वाले पेय के रूप में किया जाता है।
लेकिन इन उत्पादों की संरचना अलग-अलग हो सकती है। कुछ में कैफीन की मात्रा अधिक होती है, जबकि अन्य में विभिन्न पोषक तत्व या दूसरे घटक मौजूद हो सकते हैं।
ऐसे में उत्पाद के लेबल पर दी गई जानकारी, उसमें मौजूद तत्वों और गुणवत्ता मानकों की जांच आवश्यक है।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध हों।
प्राकृतिक होने के दावों पर भी नजर
बाजार में कई स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद प्राकृतिक तत्वों से तैयार होने का दावा करते हैं।
हालांकि, किसी उत्पाद को प्राकृतिक बताना उसके हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।
उत्पाद की सुरक्षा उसकी सामग्री, इस्तेमाल की मात्रा और सेवन करने वाले व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
इसी कारण खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों में उत्पादों की लेबलिंग और भ्रामक दावों पर नियंत्रण के प्रावधान हैं।
प्रशासन का विशेष अभियान ऐसे उत्पादों के संबंध में उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नाबालिगों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष चेतावनी
अभियान के दौरान विक्रेताओं को नाबालिगों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने बिना चिकित्सकीय परामर्श या पर्ची के इन वर्गों को प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स न बेचने की चेतावनी दी है।
हालांकि, सभी प्रकार के प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री के लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होने का कोई सार्वभौमिक कानूनी प्रावधान इस रिपोर्ट में सत्यापित नहीं हुआ है।
इसलिए विभागीय चेतावनी और कानूनन अनिवार्य प्रतिबंध के बीच अंतर समझना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ आमतौर पर गर्भावस्था में अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों के सेवन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
युवाओं में फिटनेस उत्पादों का बढ़ता इस्तेमाल
आजकल जिम, व्यायाम और फिटनेस गतिविधियों के साथ पोषण संबंधी उत्पादों का इस्तेमाल भी किया जाता है।
कई युवा अपने आहार में प्रोटीन सप्लीमेंट शामिल करते हैं। कुछ लोग लंबे समय तक काम करने या पढ़ाई के दौरान ऊर्जा बढ़ाने के उद्देश्य से कैफीनयुक्त पेय पदार्थ लेते हैं।
हालांकि, हर व्यक्ति को अतिरिक्त प्रोटीन सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं होती।
आहार से मिलने वाले प्रोटीन और शरीर की जरूरतों का आकलन व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य तथा शारीरिक गतिविधियों के आधार पर किया जाता है।
ऐसे में बिना जरूरत या उचित जानकारी के सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने के बजाय विश्वसनीय चिकित्सकीय या पोषण संबंधी सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
मिलावट और गलत लेबलिंग की होगी जांच
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई में एकत्र नमूनों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
प्रयोगशाला जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि उत्पाद में मौजूद तत्व निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
इसके अलावा पैकेट पर लिखी जानकारी और वास्तविक सामग्री के बीच अंतर होने की स्थिति भी जांच में सामने आ सकती है।
हालांकि, केवल नमूने एकत्र होने से किसी उत्पाद में मिलावट या प्रतिबंधित पदार्थ होने की पुष्टि नहीं होती।
इस अभियान में लिए गए 73 नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने उत्पाद मानकों पर खरे उतरे हैं और किन मामलों में कार्रवाई की आवश्यकता है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर पहले भी दिए गए निर्देश
हरियाणा सरकार पहले से ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर निरीक्षण और जांच का दायरा बढ़ा रही है।
11 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए थे।
बैठक में अधिकारियों ने बताया था कि वर्ष 2026 के दौरान कैफीनयुक्त पेय पदार्थों, दुग्ध उत्पादों और खाद्य सामग्री की लेबलिंग से संबंधित विशेष जांच अभियान चलाए गए हैं।
सरकार ने त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नमूने लेने और निरीक्षण बढ़ाने पर भी जोर दिया था।
खाद्य जांच प्रयोगशालाओं को किया जाएगा मजबूत
प्रदेश सरकार खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक जांच क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है।
हरियाणा सरकार की सितंबर 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हिसार और नारनौल में खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 24 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
राज्य में आठ व्यापक खाद्य जांच प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है।
इनमें हिसार, नारनौल, सिरसा, जींद, यमुनानगर, रोहतक, फरीदाबाद और गुरुग्राम शामिल हैं।
प्रयोगशालाओं के विस्तार से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और नियमों का उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं पर हो सकती है कार्रवाई
खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट की बिक्री करने वाले कारोबारियों को संबंधित खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है।
इसमें आवश्यक पंजीकरण या लाइसेंस, सही लेबलिंग, निर्धारित सामग्री और गुणवत्ता मानकों का पालन शामिल है।
यदि किसी उत्पाद में प्रतिबंधित तत्व, मिलावट या भ्रामक लेबलिंग की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, हरियाणा के मौजूदा विशेष अभियान में अब तक किसी विक्रेता पर जुर्माना लगाया गया है या किसी प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द हुआ है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
उपभोक्ता भी खरीदारी करते समय बरतें सावधानी
प्रोटीन पाउडर या एनर्जी ड्रिंक खरीदते समय उपभोक्ताओं को उत्पाद का लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए।
पैकेट पर निर्माण और समाप्ति की तारीख, सामग्री, कैफीन की मात्रा तथा इस्तेमाल संबंधी चेतावनी देखना उपयोगी है।
पैकेजिंग पर किए गए बड़े स्वास्थ्य संबंधी दावों को वैज्ञानिक प्रमाण के बिना सही नहीं मानना चाहिए।
विशेष रूप से बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हो सकती है।
सभी सप्लीमेंट को हानिकारक मानना भी सही नहीं होगा। गुणवत्ता और जरूरत के अनुसार उचित उत्पादों का उपयोग अलग विषय है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
हरियाणा में न्यूट्रास्युटिकल्स, प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स के खिलाफ शुरू किया गया विशेष अभियान खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ा है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, 61 स्थानों से 73 नमूने लिए गए हैं।
अब प्रयोगशाला जांच से यह स्पष्ट होगा कि इन उत्पादों में किसी प्रकार की मिलावट, गलत लेबलिंग या गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
सरकार का उद्देश्य युवाओं को बेचे जाने वाले स्वास्थ्य और फिटनेस उत्पादों की निगरानी मजबूत करना है। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।





