
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम शहर में क्लस्टर आधारित आउटडोर विज्ञापन प्रणाली लागू कर अगले तीन वर्षों में करीब 445 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की योजना बना रहा है। हालांकि, इस योजना के तहत आयोजित ई-नीलामी प्रक्रिया को कम भागीदारी के कारण रोकना पड़ा। अब नगर निगम पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने की तैयारी कर रहा है। निगम का उद्देश्य विज्ञापन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ-साथ राजस्व में बढ़ोतरी करना है।
नगर निगम ने शहर को छह क्लस्टर में बांटकर विज्ञापन अधिकार देने की योजना तैयार की थी। इसके माध्यम से निगम को उम्मीद थी कि हर साल लगभग 150 करोड़ रुपये की आय हो सकेगी। लेकिन ई-आक्शन में अपेक्षित संख्या में विज्ञापन एजेंसियों ने रुचि नहीं दिखाई। नियमों के अनुसार नीलामी प्रक्रिया में कम से कम तीन एजेंसियों की भागीदारी जरूरी थी, जबकि इस बार केवल दो एजेंसियों ने ही बोली प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसके चलते निगम को ई-नीलामी रद्द करनी पड़ी।
अब निगम अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि विज्ञापन एजेंसियों को आकर्षित करने के लिए नियमों में बदलाव किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार हरियाणा में विज्ञापन बायलाज वर्ष 2018 में लागू किए गए थे, जिनमें वर्ष 2022 में संशोधन किया गया था। बदलते बाजार और विज्ञापन क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए अब इसमें दोबारा संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विज्ञापन एजेंसियों ने निगम के सामने कई सुझाव रखे हैं। एजेंसियों का कहना है कि एलईडी स्क्रीन और अन्य आधुनिक विज्ञापन उपकरण बाहर से मंगाने पड़ते हैं, जिन्हें लगाने में एक से डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है। इसलिए शुरुआती अवधि का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा एजेंसियों ने दिल्ली की तर्ज पर एलईडी स्क्रीन का आकार बढ़ाने की अनुमति देने और विज्ञापन अवधि को तीन वर्ष से बढ़ाकर कम से कम पांच वर्ष करने की मांग की है।
एजेंसियों का मानना है कि लंबी अवधि मिलने से निवेश पर बेहतर रिटर्न मिल सकेगा और ज्यादा कंपनियां नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आगे आएंगी। नगर निगम अब इन सुझावों पर विज्ञापन एजेंसियों के साथ बैठक करेगा और इसके बाद संशोधन प्रस्ताव तैयार कर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजेगा। विभाग की मंजूरी के बाद हरियाणा विज्ञापन बायलाज में बदलाव किया जा सकता है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि क्लस्टर आधारित विज्ञापन प्रणाली लागू होने से शहर में अवैध विज्ञापनों पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर लगे विज्ञापनों की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। नई व्यवस्था के तहत विज्ञापन स्थलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन तरीके से संचालित होगी।
नगर निगम के लिए विज्ञापन राजस्व आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। पिछले वित्त वर्ष में निगम ने विज्ञापनों से करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। अधिकारियों को उम्मीद है कि क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद आय में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
इसके अलावा नगर निगम मेट्रो क्षेत्र में भी विज्ञापन अधिकार देने की योजना पर काम कर रहा है। एचएमआरटीसी क्षेत्र में मेट्रो स्टेशनों और आसपास के इलाकों में विज्ञापन लगाने के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जा रही है। यहां भी ई-आक्शन में केवल दो एजेंसियों ने हिस्सा लिया था, जिसके कारण प्रक्रिया रोकनी पड़ी। अब निगम इस मॉडल की शर्तों की भी समीक्षा करेगा।
नगर निगम का कहना है कि संशोधित नियमों के बाद अधिक कंपनियां नीलामी में हिस्सा लेंगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे न केवल निगम की आय में वृद्धि होगी, बल्कि शहर में विज्ञापन व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी।





