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Rewari रेवाड़ी के मसानी बैराज से "रासायनिक रूप से दूषित" पानी को पास के झज्जर जिले के 'ड्रेन नंबर 8' में मोड़ने की योजना विवादों में आ गई है। यह योजना जल संरक्षण और बैराज में जमा पानी के पुन: उपयोग के लिए बनाई गई थी। कई गांवों के निवासियों और बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने इस परियोजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण और खेती पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसमें भूजल का दूषित होना और मिट्टी की सेहत खराब होना शामिल है।
उन्होंने इस परियोजना को तुरंत रोकने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं देती है, तो वे आंदोलन करेंगे। डुलिना गांव के एक सामाजिक कार्यकर्ता राम कंवर ने दावा किया, "राजस्थान के भिवाड़ी और रेवाड़ी के धारूहेड़ा व बावल औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाला बिना साफ किया गया औद्योगिक कचरा (एफ्लुएंट्स) सालों से इस बैराज में जमा हो रहा है। यह पानी जैविक रूप से इतना खराब हो चुका है कि इससे जलीय जीवों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसने आसपास के 15 गांवों में भूजल को पीने और घरेलू इस्तेमाल के लायक नहीं छोड़ा है, साथ ही मिट्टी की सेहत को भी नुकसान पहुंचाया है।"
उन्होंने बताया कि सरकार ने इस प्रदूषित औद्योगिक कचरे को एक भूमिगत पाइपलाइन के जरिए सिलानी गांव के पास 'ड्रेन नंबर 8' में भेजने के लिए यह परियोजना शुरू की है। उन्होंने आगे कहा, "परियोजना का काम झज्जर जिले के नांगला गांव तक पहुंच चुका है। पाइपलाइन अब अपने अंतिम बिंदु, औरंगपुर गांव से महज 5 किमी दूर है। वहां इसे एक खुली नाली से जोड़ा जाएगा, ताकि प्रदूषित पानी को 'ड्रेन नंबर 8' में डाला जा सके।"
राम कंवर का दावा है कि इस पानी के बहाव से आसपास के इलाकों का भूजल दूषित हो जाएगा और जमीन खेती के लायक नहीं बचेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस परियोजना को जल्दबाजी में लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 'हरियाणा अंडरग्राउंड पाइपलाइन्स (एक्विजिशन ऑफ यूजर इन लैंड) एक्ट, 2008' की धारा 4 के तहत जमीन अधिग्रहण की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया है और न ही पाइपलाइन बिछाने से पहले जमीन मालिकों को कोई मुआवजा दिया है। उन्होंने इस काम को "गैर-कानूनी" करार दिया।
विधायक वत्स ने भी इस परियोजना का विरोध किया और मुख्यमंत्री को चेतावनी दी कि इससे झज्जर जिले का भूजल दूषित होगा और यहां के लोगों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री को ग्रामीणों की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए, चल रहे काम को तुरंत रोकने का आदेश देना चाहिए और इस परियोजना को किसी दूसरी जगह पर स्थानांतरित करना चाहिए।" इस बीच, 10 से अधिक गांवों के निवासियों ने डीसी वर्षा खंगवाल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और हस्तक्षेप की मांग की।
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