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मनरेगा पर हरियाणा सीएम के बयान को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का पलटवा

SHIDDHANT
19 Jan 2026 11:25 PM IST
मनरेगा पर हरियाणा सीएम के बयान को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का पलटवा
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Haryana हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर दिए गए बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर कड़ा पलटवार करते हुए इसे अज्ञानता और अहंकार का उदाहरण बताया है। चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि “अज्ञान और अहंकार इंसान को नीचे गिरा देता है। मनरेगा जैसी योजना ने देश के सबसे गरीब और वंचित वर्ग को रोजगार और सम्मान देने का काम किया है।” उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह योजना इतनी ही खराब थी, तो केंद्र सरकार ने इसके बजट में लगातार बढ़ोतरी क्यों की।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई वर्षों तक मनरेगा पर 90 हजार करोड़ रुपये तक का बजट खर्च किया है। “अगर यह योजना विफल थी या नुकसानदेह थी, तो फिर सरकार ने इस पर इतने बड़े पैमाने पर पैसा क्यों लगाया?” उन्होंने इसे सरकार की कथनी और करनी में फर्क करार दिया। मनीष तिवारी ने कहा कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। खासतौर पर कोरोना महामारी के कठिन दौर में इस योजना ने करोड़ों लोगों को सहारा दिया। “जब लॉकडाउन के दौरान शहरों से मजदूर अपने गांव लौटे, तब मनरेगा ही वह योजना थी, जिसने उन्हें रोजगार और जीवन यापन का साधन दिया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है। “एयर कंडीशन कमरों में बैठकर ग्रामीण भारत की समस्याओं को नहीं समझा जा सकता। मनरेगा ने गांवों में सड़क, तालाब, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है,” तिवारी ने कहा। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि मनरेगा ने सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिससे महिलाओं, दलितों और आदिवासी समुदायों को सबसे अधिक लाभ मिला। “यह योजना गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय का एक सशक्त माध्यम रही है,” उन्होंने जोड़ा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनरेगा को लेकर यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, खासकर तब जब ग्रामीण रोजगार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
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