
गुरुग्राम। देश के प्रमुख साइबर शहरों में शामिल गुरुग्राम में प्रदूषण और विकास कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में शहर की सड़कों, जलनिकासी, स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण और विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रदूषण के मुद्दे पर अधिकारियों से जवाब-तलब किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के एक क्षेत्रीय अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने और निलंबन की संभावना की चर्चा भी सामने आई है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य फोकस गुरुग्राम में चल रहे विकास कार्यों की स्थिति और उन योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा। अधिकारियों से अलग-अलग परियोजनाओं की प्रगति, लंबित कार्यों और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों की जानकारी ली गई। शहर में प्रदूषण नियंत्रण भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
गुरुग्राम में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ने की समस्या को देखते हुए प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों पर लगातार निगरानी का दबाव रहता है। हाल के दिनों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाली निर्माण साइटों पर भी कार्रवाई की गई है। HSPCB ने सितंबर में दक्षिणी गुरुग्राम की 400 से ज्यादा निर्माण और ध्वस्तीकरण साइटों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से 34 साइटों को बंद करने की सिफारिश की गई थी।
इन साइटों पर अनिवार्य निगरानी व्यवस्था में कमियां पाई गई थीं। अधिकारियों के अनुसार कई जगह PTZ कैमरे उपलब्ध नहीं थे, एयर क्वालिटी सेंसर काम नहीं कर रहे थे या लाइव फीड की समस्या थी। धूल नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी से संबंधित नियमों के पालन में कमी सामने आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगे जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, HSPCB के एक क्षेत्रीय अधिकारी पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारी के निलंबन की बात सामने आई है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस संबंध में औपचारिक आदेश की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कार्रवाई की अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी आदेश के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
बैठक में गुरुग्राम की सड़कों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण शहर में सड़क निर्माण, मरम्मत और यातायात प्रबंधन को लगातार मजबूत करने की जरूरत बताई जाती रही है। राज्य प्रशासन की ओर से अलग-अलग एजेंसियों को सड़क संबंधी शिकायतों के निपटारे और लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं।
जलनिकासी व्यवस्था भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में रही। मानसून के दौरान गुरुग्राम के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आती है। हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी गुरुग्राम में पानी की स्थिति, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलभराव से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही और जल प्रबंधन को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई थी।
शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी समीक्षा के दायरे में रही। ठोस कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक स्थानों की सफाई को लेकर राज्य सरकार पहले भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति और नागरिकों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी लेने पर जोर दिया है।
प्रदूषण के संदर्भ में गुरुग्राम प्रशासन आगामी सर्दियों को लेकर पहले से तैयारी कर रहा है। हाल ही में 1,000 से अधिक स्थानों पर उत्सर्जन निगरानी सेंसर नेटवर्क लगाने की योजना सामने आई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति की लाइव निगरानी करना बताया गया है। इसके साथ ही सड़कों की लगातार सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ाने जैसे कदमों पर भी काम किया जा रहा है।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी प्रशासन स्तर पर कई उपायों की तैयारी की जा रही है। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले और निर्धारित अवधि से बाहर के वाहनों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े उपायों पर विचार किया गया है। सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP के तहत अतिरिक्त कदम लागू किए जाते हैं, ऐसे में गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी पहले से तेज की जा रही है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में यह भी देखा गया कि अलग-अलग विभाग अपने निर्धारित कार्यों को कितनी तेजी से पूरा कर रहे हैं। गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहर में नगर निगम, GMDA, PWD, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। किसी एक क्षेत्र में लापरवाही का असर दूसरी नागरिक सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल वायु गुणवत्ता की निगरानी पर्याप्त नहीं है। निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल, सड़क किनारे जमा मिट्टी, कचरा जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआं और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन को अलग-अलग स्रोतों पर समानांतर कार्रवाई करनी पड़ती है।
HSPCB की मौजूदा निगरानी व्यवस्था में क्षेत्रीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बोर्ड की आधिकारिक जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के लिए उत्तर और दक्षिण दो क्षेत्रीय कार्यालय कार्यरत हैं। इनके अंतर्गत शहर के अलग-अलग औद्योगिक और भौगोलिक क्षेत्र आते हैं।
बैठक में प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की चर्चा इसी व्यापक निगरानी व्यवस्था के संदर्भ में सामने आई है। हालांकि किसी अधिकारी के खिलाफ अंतिम विभागीय कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी आधिकारिक आदेश के बाद ही मानी जाएगी।
गुरुग्राम में विकास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखे जा सकते। शहर में लगातार निर्माण और तेजी से बढ़ती आबादी के बीच सड़क, जलनिकासी, कचरा प्रबंधन और वायु गुणवत्ता जैसी समस्याओं का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। इसी कारण मुख्यमंत्री की बैठक में इन सभी मुद्दों को एक साथ समीक्षा के दायरे में रखा गया।
अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निर्देशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जाए। निर्माण साइटों पर नियमों का पालन, सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण, निगरानी कैमरों और सेंसर की कार्यक्षमता तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे विषयों पर लगातार नजर रखनी होगी। हालिया कार्रवाई से संकेत मिलता है कि प्रदूषण संबंधी अनुपालन पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बैठक के बाद अब प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर अधिकारियों की जवाबदेही पर नजर रहेगी। HSPCB के क्षेत्रीय अधिकारी पर कार्रवाई की चर्चा के बीच यह भी देखा जाएगा कि सरकार की ओर से कोई औपचारिक निलंबन आदेश जारी होता है या नहीं। फिलहाल समीक्षा बैठक ने गुरुग्राम में प्रदूषण, स्वच्छता, सड़क और जलनिकासी से जुड़े मुद्दों को फिर से प्रशासनिक प्राथमिकता के केंद्र में ला दिया है।





