हरियाणा

शीतला माता मंदिर में छठ की तैयारियां शुरू, 13 से 16 नवंबर तक आयोजन

nidhi
13 Oct 2026 11:23 AM IST
शीतला माता मंदिर में छठ की तैयारियां शुरू, 13 से 16 नवंबर तक आयोजन
x
गुरुग्राम: शीतला माता मंदिर के पार्किंग ग्राउंड में छठ पूजा के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पाटलिपुत्र सांस्कृतिक चेतना समिति की कोर कमेटी ने बैठक कर आयोजन पर चर्चा की। न्यू दयानंद कॉलोनी में सोमवार को हुई बैठक की अध्यक्षता समिति के संरक्षक बीएन लाल ने की। हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर के पार्किंग ग्राउंड में छठ पूजा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
समिति के अनुसार, चार दिवसीय महापर्व 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। बीएन लाल ने कार्यकर्ताओं से तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने पूजा को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए अपने सुझाव भी रखे। बैठक में समिति के अध्यक्ष श्रीप्रकाश राय, महासचिव संत कुमार, कोषाध्यक्ष अजय सिंह, सलाहकार संजय कुमार सिंह और उपाध्यक्ष राजेश मंडल उपस्थित रहे। संगठन सचिव अनुपम झा, सचिव सत्यनारायण गुप्ता, मंजय सिंह तथा अन्य कार्यकर्ताओं ने भी तैयारियों पर चर्चा में भाग लिया। फिलहाल समिति ने आयोजन स्थल और चारों दिनों का कार्यक्रम बताया है।
छठ पूजा की शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी। चार दिवसीय पर्व का यह पहला चरण है। परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रती स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। घर और पूजा से संबंधित सामग्री की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नहाय-खाय के साथ परिवारों में आगे के अनुष्ठानों और प्रसाद की तैयारी शुरू होती है। छठ में शुद्धता और अनुशासन को धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
14 नवंबर को खरना होगा। छठ पूजा का दूसरा दिन खरना या लोहंडा कहलाता है। परंपरा के अनुसार, व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना के प्रसाद में गुड़ से बनी खीर का विशेष स्थान होता है। इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जो अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूरा किया जाता है। यह विवरण पर्व की सामान्य धार्मिक परंपरा से संबंधित है।
15 नवंबर को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन व्रती डूबते सूर्य की उपासना करते हैं। छठ पूजा की विशेषता है कि इसमें सूर्यास्त और सूर्योदय, दोनों अवसरों पर अर्घ्य देने की परंपरा है। पूजा के लिए सूप और दौरे में प्रसाद तथा अन्य सामग्री रखी जाती है। ठेकुआ छठ के प्रमुख प्रसादों में शामिल है। व्रती अपने परिवार के सदस्यों के साथ सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की जाती है। वैदिकबर्थ
16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होगा। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती पारण करके अपना व्रत पूरा करते हैं। इस तरह नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के चार चरणों में छठ पूजा संपन्न होती है। वर्ष 2026 के लिए उपलब्ध पर्व कैलेंडर में भी नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर बताया गया है।
छठ सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का लोकपर्व है। इसमें व्रत, प्रसाद की तैयारी और अर्घ्य के अनुष्ठान प्रमुख होते हैं। पूजा की सामग्री तैयार करने में परिवार के सदस्य भी सहयोग करते हैं। स्वच्छता और सात्विकता का पालन पूरे आयोजन के दौरान किया जाता है। गुरुग्राम में घोषित कार्यक्रम इसी चार दिवसीय क्रम के अनुसार रखा गया है। श्रद्धालुओं के लिए आयोजन का मुख्य स्थान शीतला माता मंदिर का पार्किंग ग्राउंड रहेगा।
Next Story