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बिजनेस पार्टनर की फर्जी ईमेल बनाकर ठगी

Kavita2
8 Oct 2026 4:38 PM IST
बिजनेस पार्टनर की फर्जी ईमेल बनाकर ठगी
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फतेहाबाद। साइबर अपराधियों ने कारोबारी को निशाना बनाने के लिए ठगी का नया तरीका अपनाया है। आरोपियों ने पहले इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कारोबारी की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। इसके बाद उसके कारोबार, व्यावसायिक संपर्कों और बिजनेस पार्टनर से संबंधित जानकारी हासिल की। पूरी तैयारी के बाद साइबर ठगों ने कारोबारी के बिजनेस पार्टनर के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ईमेल आईडी तैयार की। इसी ईमेल आईडी से कारोबारी को बैंक खाता बदलने का संदेश भेजा गया। ठगों का उद्देश्य कारोबारी को विश्वास में लेकर करीब 20 लाख रुपये की रकम अपने खाते में मंगवाना था। इस घटना ने कारोबारी लेनदेन में ईमेल के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि पूरी रकम आरोपियों के खाते में पहुंच गई थी या ठगी का प्रयास किसी चरण में पकड़ लिया गया।

पहले इंटरनेट मीडिया पर की कारोबारी की रेकी

साइबर ठगों ने इस मामले में सीधे कारोबारी से रुपये मांगने के बजाय पहले उसके बारे में जानकारी इकट्ठा की।

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने इंटरनेट मीडिया पर कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रखी। उन्होंने उसके व्यवसाय और उससे जुड़े लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई।

कारोबारी किन लोगों के साथ काम करता है और उसके व्यावसायिक संपर्क कौन हैं, यह जानकारी ठगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।

इस तरह की गतिविधियों को डिजिटल रेकी कहा जा सकता है, जिसमें अपराधी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं का उपयोग किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाने के लिए करते हैं।

बिजनेस पार्टनर की फर्जी ईमेल आईडी बनाई

कारोबारी के संपर्कों की जानकारी मिलने के बाद ठगों ने उसके बिजनेस पार्टनर के नाम से फर्जी ईमेल आईडी तैयार की।

इसका उद्देश्य कारोबारी को यह विश्वास दिलाना था कि संदेश उसके वास्तविक व्यावसायिक सहयोगी ने भेजा है।

कारोबारी लेनदेन में ईमेल का इस्तेमाल भुगतान संबंधी सूचनाएं भेजने के लिए सामान्य तौर पर किया जाता है।

इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर अपराधियों ने बैंक खाते से संबंधित जानकारी बदलने का संदेश भेजा।

फर्जी ईमेल के माध्यम से किसी परिचित व्यक्ति या संस्था का रूप धारण करने की तकनीक को साइबर अपराध की भाषा में ईमेल स्पूफिंग अथवा प्रतिरूपण कहा जाता है।

हालांकि, इस मामले में मूल ईमेल खाते को हैक किया गया था या केवल उससे मिलती-जुलती नई ईमेल आईडी बनाई गई थी, इसकी तकनीकी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बैंक खाता बदलने का भेजा संदेश

फर्जी ईमेल आईडी तैयार करने के बाद आरोपियों ने कारोबारी को संदेश भेजा कि भुगतान के लिए बैंक खाते में बदलाव किया गया है।

इस तरह का संदेश मिलने पर कोई कारोबारी यह मान सकता है कि उसका व्यावसायिक सहयोगी भविष्य का भुगतान नए खाते में प्राप्त करना चाहता है।

यही इस प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का सबसे संवेदनशील चरण होता है।

यदि कारोबारी बिना स्वतंत्र पुष्टि किए नई बैंक जानकारी के आधार पर भुगतान कर देता है, तो रकम वास्तविक बिजनेस पार्टनर के बजाय अपराधियों के खाते में पहुंच सकती है।

उपलब्ध मामले में ठगों ने 20 लाख रुपये से जुड़ी धोखाधड़ी के लिए इस तरीके का इस्तेमाल किया।

भरोसेमंद कारोबारी संबंध को बनाया हथियार

इस प्रकार की साइबर ठगी में अपराधी कारोबारी के पुराने व्यावसायिक संबंधों का फायदा उठाते हैं।

जब किसी व्यक्ति को अपने नियमित बिजनेस पार्टनर के नाम से ईमेल मिलता है, तो वह सामान्य पत्राचार की तरह उस पर भरोसा कर सकता है।

ठग इसी विश्वास का उपयोग करते हुए बैंक खाते में बदलाव की सूचना भेजते हैं।

कई बार संदेश का प्रारूप ऐसा रखा जाता है कि वह किसी वास्तविक कारोबारी बातचीत का हिस्सा दिखाई दे।

हालांकि, इस घटना में फर्जी ईमेल के सटीक शब्दों और उसमें दिए गए बैंक खाते की जानकारी सामने नहीं आई है।

इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपियों ने भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज भी भेजा था या नहीं।

व्यापारिक ईमेल के जरिए बढ़ रहा धोखाधड़ी का खतरा

कारोबारियों को ईमेल के जरिए निशाना बनाने वाली ऐसी घटनाएं व्यावसायिक ईमेल धोखाधड़ी की श्रेणी में आती हैं।

इसमें अपराधी कंपनी के अधिकारी, आपूर्तिकर्ता या व्यावसायिक सहयोगी की पहचान का इस्तेमाल करते हुए भुगतान संबंधी निर्देश भेज सकते हैं।

भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी अगस्त 2026 में कारोबारियों और वित्तीय कर्मचारियों को अधिकारियों के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के प्रति चेतावनी दी थी।

सरकारी सलाह में बताया गया था कि अपराधी विश्वसनीय संपर्कों की पहचान का दुरुपयोग करके कंपनियों के वित्तीय कर्मचारियों से बड़ी रकम स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहे हैं।

मामूली बदलाव से पहचानना मुश्किल हो सकता है ईमेल

साइबर अपराधी कई मामलों में वास्तविक ईमेल पते से मिलता-जुलता पता तैयार करते हैं।

कभी किसी अक्षर की जगह दूसरा अक्षर इस्तेमाल किया जाता है, तो कभी कंपनी या संस्था के नाम में मामूली बदलाव कर दिया जाता है।

ऐसे ईमेल को सरसरी नजर से देखने पर वह वास्तविक लग सकता है।

इसी कारण केवल ईमेल भेजने वाले का नाम देखकर भुगतान संबंधी निर्देशों पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है।

ईमेल पते की पूरी जांच करना और संबंधित व्यक्ति से स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करना जरूरी है।

विशेष रूप से जब बड़ी रकम भेजने या बैंक खाता बदलने की सूचना मिले, तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

बैंक खाते में बदलाव की सूचना पर तुरंत न करें भुगतान

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कारोबारी भुगतान से जुड़ी जानकारी बदलने का अनुरोध मिलने पर उसका सत्यापन करना आवश्यक है।

यदि कोई सप्लायर, ग्राहक या बिजनेस पार्टनर नया बैंक खाता बताता है, तो पहले से उपलब्ध आधिकारिक फोन नंबर पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

संदिग्ध ईमेल में दिए गए नए नंबर पर ही संपर्क करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह नंबर भी ठगों का हो सकता है।

बड़े भुगतान से पहले बैंक खाते के नाम, खाता संख्या और अन्य आवश्यक जानकारी की जांच उपयोगी है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सुरक्षा सलाह में भी संदिग्ध ईमेल मिलने पर संबंधित व्यवसाय से सीधे संपर्क करके संदेश की वास्तविकता जांचने की सलाह दी गई है।

कारोबारियों की सार्वजनिक जानकारी का हो सकता है दुरुपयोग

आजकल कारोबारी अपने व्यवसाय के प्रचार के लिए इंटरनेट मीडिया का व्यापक उपयोग करते हैं।

वे अपनी कंपनी, उत्पादों, साझेदारों और व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी ऑनलाइन साझा करते हैं।

यह जानकारी ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करती है, लेकिन अपराधी भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

यदि किसी कारोबारी की पूरी संपर्क सूची, कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और भुगतान से संबंधित प्रक्रियाएं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों, तो अपराधियों को धोखाधड़ी की योजना बनाने में आसानी हो सकती है।

इसलिए कंपनियों को यह समीक्षा करनी चाहिए कि कौन-सी जानकारी सार्वजनिक रखना आवश्यक है और कौन-सी जानकारी केवल अधिकृत कर्मचारियों तक सीमित होनी चाहिए।

वित्तीय कर्मचारियों को भी रहना होगा सतर्क

कारोबारी संस्थानों में भुगतान की प्रक्रिया अक्सर अकाउंटेंट या वित्तीय कर्मचारियों के माध्यम से पूरी होती है।

ऐसे में बैंक खाते में बदलाव के अनुरोध को सत्यापित करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है।

कंपनियां बड़े भुगतान के लिए दो स्तरों पर स्वीकृति और स्वतंत्र पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं अपना सकती हैं।

इससे किसी एक कर्मचारी को मिले फर्जी संदेश के आधार पर बड़ी रकम गलत खाते में स्थानांतरित होने का जोखिम कम किया जा सकता है।

कर्मचारियों को फर्जी ईमेल पहचानने और संदिग्ध भुगतान निर्देशों की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को देने का प्रशिक्षण भी उपयोगी हो सकता है।

साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

यदि किसी कारोबारी को पता चलता है कि उसने धोखे से गलत बैंक खाते में रकम भेज दी है, तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचना देना महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत कर सकता है।

शिकायत के दौरान फर्जी ईमेल, बैंक लेनदेन की जानकारी, संदेशों और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों को सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।

जल्दी शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को संदिग्ध लेनदेन की जानकारी समय रहते उपलब्ध हो सकती है। हालांकि, रकम वापस मिलना जांच और बैंकिंग प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की पुष्टि बाकी

इस विशेष मामले में कारोबारी और उसके बिजनेस पार्टनर की पहचान का विवरण उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि साइबर ठगों ने कौन-सा बैंक खाता इस्तेमाल किया और रकम किस खाते में भेजने के लिए कहा गया था।

इसी तरह किसी आरोपी की गिरफ्तारी या पुलिस द्वारा रकम बरामद किए जाने की भी पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए मामले में पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी और धनराशि की वापसी से संबंधित कोई दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।

कारोबारियों के लिए चेतावनी बनी घटना

करीब 20 लाख रुपये की ठगी के लिए अपनाई गई यह योजना दिखाती है कि साइबर अपराधी अब केवल अनजान लिंक भेजकर लोगों को निशाना नहीं बना रहे हैं।

वे पहले संभावित शिकार के कारोबार और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद परिचित व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके भरोसा हासिल करने की कोशिश करते हैं।

इस मामले में आरोपियों ने कारोबारी के बिजनेस पार्टनर की फर्जी ईमेल आईडी बनाकर बैंक खाता बदलने का संदेश भेजा।

यह घटना कारोबारी संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है कि केवल परिचित नाम से प्राप्त ईमेल के आधार पर बैंकिंग जानकारी में बदलाव या बड़ी रकम का भुगतान नहीं करना चाहिए। भुगतान से पहले स्वतंत्र पुष्टि और सुरक्षित वित्तीय प्रक्रिया अपनाकर ऐसी साइबर ठगी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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