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आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या मामले में गैंगस्टर अबू जाट पर आरोप तय

Saba Naaz
13 July 2026 3:07 PM IST
आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या मामले में गैंगस्टर अबू जाट पर आरोप तय
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फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित जिला नीमका जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में हुए बहुचर्चित हत्याकांड मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के मामले में आरोपी गैंगस्टर अरुण चौधरी उर्फ अबू जाट के खिलाफ हत्या और एक साथी बंदी को धमकाने के आरोप तय कर दिए हैं। फरीदाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने इन आरोपों को तय करते हुए मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू करने का आदेश जारी किया है।

वर्तमान में सुरक्षा कारणों से करनाल जेल में बंद गैंगस्टर अरुण चौधरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश किया गया था। आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया के दौरान अबू जाट ने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया और अदालत से मुकदमा चलाने की मांग की।

हाई सिक्योरिटी वार्ड में गमछे और पत्थर से की थी हत्या

यह सनसनीखेज वारदात 8 फरवरी की रात नीमका जिला जेल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हाई सिक्योरिटी वार्ड में घटित हुई थी। पुलिस और जेल प्रशासन की जांच रिपोर्ट के अनुसार, मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर अरुण चौधरी उर्फ अबू जाट और संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान एक ही वार्ड में बंद थे।

वारदात वाली रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद अबू जाट ने बेहद शातिराना अंदाज में अपने गमछे में एक भारी पत्थर बांधा और सो रहे या असावधान खड़े अब्दुल रहमान पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आने के कारण अब्दुल रहमान की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था और स्थानीय पुलिस ने हत्या व अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

राम मंदिर पर हमले की साजिश का आरोपी था मृतक अब्दुल रहमान

इस हत्याकांड का शिकार हुआ अब्दुल रहमान कोई साधारण बंदी नहीं था, बल्कि वह देश की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के मिल्कीपुर का निवासी अब्दुल रहमान देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त था। मार्च 2025 में गुजरात एटीएस (Anti-Terrorism Squad) और हरियाणा एसटीएफ (Special Task Force) ने एक संयुक्त बड़े ऑपरेशन के तहत उसे फरीदाबाद के पाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसियों का दावा था कि अब्दुल रहमान अयोध्या स्थित नवनिर्मित भव्य राम मंदिर पर एक बड़े आत्मघाती या आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। गिरफ्तारी के वक्त उसके कब्जे से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड (हथगोले) भी बरामद किए गए थे। देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में उसके खिलाफ सख्त गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद उसे नीमका जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया था।

जम्मू-कश्मीर का कुख्यात गैंगस्टर है हमलावर अबू जाट

अब्दुल रहमान की हत्या करने वाला आरोपी अरुण चौधरी उर्फ अबू जाट भी एक बेहद खतरनाक और कुख्यात अपराधी है। जम्मू-कश्मीर में उसके खिलाफ रंगदारी, हत्या का प्रयास और गैंगस्टर एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। जम्मू-कश्मीर की जेलों में उसकी बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए ही कुछ समय पहले उसे वहां से ट्रांसफर करके फरीदाबाद की नीमका जेल भेजा गया था। जेल सूत्रों के अनुसार, जेल के भीतर भी इन दोनों खतरनाक बंदियों के बीच वैचारिक या व्यक्तिगत कारणों से कई बार तीखी नोकझोंक और विवाद की खबरें सामने आती रही थीं, जिसने अंततः इस खूनी अंजाम का रूप ले लिया।

सुरक्षा व्यवस्था की जांच और नियमित ट्रायल की शुरुआत

जेल के भीतर एक हाई-प्रोफाइल बंदी की हत्या के बाद हरियाणा सरकार और जेल मुख्यालय ने इस मामले की गहन न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दिए थे। इसके साथ ही कड़े सुरक्षा घेरे वाले वार्ड में पत्थर कहां से आया और सुरक्षा में चूक कैसे हुई, इसकी भी विभागीय जांच कराई गई थी।

अब अदालत द्वारा औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय किए जाने के बाद इस पूरे मामले का रेगुलर ट्रायल शुरू होने जा रहा है। आने वाली सुनवाइयों में अभियोजन पक्ष (Prosecution) जेल के चश्मदीद गवाहों, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अबू जाट के खिलाफ दोष सिद्ध करने का प्रयास करेगा। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष (Defense) के वकीलों ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए अदालत में अपनी दलीलें पेश करने की बात कही है। इस मामले पर अब पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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