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Chandigarh: मसानी बैराज परियोजना पर अपडेट, केंद्र बनाएगी नई ड्रेन

Admindelhi1
25 Feb 2026 2:07 AM IST
Chandigarh: मसानी बैराज परियोजना पर अपडेट, केंद्र बनाएगी नई ड्रेन
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चंडीगढ़: दिल्ली-राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मसानी बैराज में स्वच्छ पानी भरा जाएगा और राष्ट्रीय राजमार्ग साथ ड्रेन बनाई जाएगी। इसको लेकर केंद्र सरकार की ओर से 150 करोड़ रुपये की राशि मंजूरी गई है। इसमें 25-25 करोड़ की राशि हरियाणा और राजस्थान सरकार द्वारा दी जाएगी। हरियाणा विधानसभा में यह जवाब पर्यावरण मंत्री राव नरबीर ने इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला द्वारा शून्यकाल में मसानी बैराज के प्रदूषित पानी के मुद्दे पर दिया।

शून्यकाल के दौरान अर्जुन चौटाला ने मुद्दा उठाया कि राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी मसानी बैराज में आ रहा है, जिसके चलते इस क्षेत्र में बीमारियां फैल रही है और साथ ही, गांवों की जमीन भी बंजर हो रही है। पर्यावरण मंत्री ने भी माना कि प्रदूषित पानी के चलते साथ लगते गांवों की जमीन की उपजाऊ क्षमता पर असर पड़ा है। मगर अब मसानी बैराज में आने वाला प्रदूषित पानी बंद हो चुका है। बैराज में बरसात का पानी भरा जाएगा। राजमार्ग के साथ-साथ केंद्र सरकार की ओर से ड्रेन बनाने को मंजूरी दी गई है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।

हरियाणा द्वारा 25 करोड़ रुपये देने के जवाब पर अर्जुन चौटाला ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी आ रहा है तो उन पर एनजीटी के नियमों की उल्लंघना करने पर जुर्माना लगाना चाहिए, हरियाणा हर्जाना क्यों भरे। अर्जुन चौटाला ने आरोप लगायाकि दिल्ली सरकार यमुना में, पंजाब सरकार घग्गर में और राजस्थान सरकार मसानी बैराज में गंदा पानी छोड़ती है। हरियाणा कोई प्रदेश है या डस्टबिन है।

सडक़ों किनारे लगाई जाए हैजिंग: विधायक अर्जुन चौटाला ने शून्यकाल में सडक़ों के किनारे खड़े पेड़ों से गाड़ी टकराने के कारण होने वाले एक्सीडेंट से हो रही मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आए दिन रोड पर चलते हुए पेड़ से टकरा जाने के कारण यह हादसे होते हैं। समय पर पेड़ों की कटाई और छटाई नहीं की जाती। कुछ दिन पहले ही रोहतक के घुसकानी गांव के पांच नौजवान गाड़ी के पेड़ से टकराने के कारण मारे गए। हम विकसित भारत की तो बात करते हैं लेकिन जितने भी विकसित देश हैं वहां सडक़ों के किनारे पेड़ नहीं लगाए जाते और जहां पेड़ होते हैं वहां प्रयाप्त बैरियर लगाए जाते हैं। सरकार सडक़ किनारे लगे पेड़ों को काट कर उनसे जो आमदनी होगी उसकी आधी किसान को दी जाए और आधी सरकार सडक़ों के दोनो तरफ ग्रीन बेल्ट और हेजिंग करने पर खर्च करे।

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