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Chandigarh: चंडीगढ़: Pet and Community Dog Bye-Laws को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि यह नीति नागरिकों के सुझावों को शामिल कर तैयार की गई है और इसका उद्देश्य पालतू पशुओं और सामुदायिक कुत्तों के बीच संतुलित सहअस्तित्व सुनिश्चित करना है। गुलाबचंद कटारिया ने कहा, “यह मामला लंबे समय से चर्चा में था। हमने इस पर कई सार्वजनिक सुनवाई कीं। लोगों से सुझाव मांगे, और उनके सुझावों को शामिल करते हुए यह नीति तैयार की गई है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शहर में इंसानों और जानवरों दोनों के अधिकारों की रक्षा हो।”
राज्यपाल ने बताया कि नई नीति में पालतू जानवरों के पंजीकरण, टीकाकरण, स्वच्छता, और जिम्मेदार मालिकाना हक से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके अलावा, सामुदायिक कुत्तों (Community Dogs) के लिए फीडिंग ज़ोन, स्टरलाइजेशन और स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को भी नीति में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अब चंडीगढ़ प्रशासन का उद्देश्य है कि शहर को “Pet-Friendly City” बनाया जाए, लेकिन साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और साफ-सफाई से कोई समझौता न हो। कटारिया ने कहा, “कई बार पालतू या सामुदायिक कुत्तों को लेकर विवाद सामने आते हैं। इस नीति के जरिए ऐसे विवादों का समाधान वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण से किया जा सकेगा।”
नई बायलॉ में यह भी प्रावधान है कि पालतू पशु रखने वाले नागरिकों को नगर निगम में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि किसी ने पालतू जानवर का पंजीकरण नहीं कराया तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, सामुदायिक कुत्तों के लिए नगर निगम और पशु कल्याण संगठनों के संयुक्त सहयोग से खाद्य और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। राज्यपाल ने बताया कि इस नीति में Animal Welfare Board of India के दिशानिर्देशों का पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि जनता और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं दोनों को इसमें शामिल करना प्रशासन की पारदर्शी कार्यप्रणाली को दर्शाता है। “यह सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि समाज के लिए जिम्मेदारी का दस्तावेज है, ताकि इंसान और पशु दोनों शांति से रह सकें,” उन्होंने जोड़ा।
चंडीगढ़ प्रशासन अब आने वाले हफ्तों में इस बायलॉ को औपचारिक रूप से अधिसूचित करेगा। नगर निगम को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस नीति के तहत अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें। इसमें स्कूलों, आवासीय सोसाइटियों और एनजीओ को शामिल किया जाएगा ताकि सामुदायिक स्तर पर पालतू पशुओं की देखभाल की संस्कृति विकसित हो सके। इस नीति को लेकर पशु अधिकार संगठनों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इससे शहर में स्ट्रे डॉग्स के प्रति संवेदनशील व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा और हिंसक घटनाओं में कमी आएगी।
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