Chandigarh: छात्र संगठनों के विरोध से बदला सिख इतिहास पाठ्यक्रम का फैसला

चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने स्नातकोत्तर स्तर पर सिख इतिहास के पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों को वापस ले लिया है। छात्र संगठनों की आपत्तियों के बाद विभाग ने यह कदम उठाया और भरोसा दिया कि उनकी मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम एक सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
इतिहास विभाग ने पहले सिख इतिहास से जुड़े पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए थे। इनमें कई विषयों को अनिवार्य के बजाय वैकल्पिक बनाने का निर्णय भी शामिल था। इस पर छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि बदलावों के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना था कि पाठ्यक्रम में दोहराव कम करने और विद्यार्थियों को अधिक विकल्प देने के उद्देश्य से संशोधन किए गए थे। छात्र संगठन ‘साथ’ ने इस संबंध में कुलपति को ज्ञापन भी सौंपा था। लगातार विरोध और आपत्तियों के बाद इतिहास विभाग ने पूर्व निर्णय वापस लेने की बात कही।
इतिहास विभाग के अध्यक्ष जसबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के पीछे किसी प्रकार की राजनीतिक प्रतिशोध की भावना नहीं थी। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी मांग के अनुसार पाठ्यक्रम को एक सप्ताह के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
इस फैसले का शिरोमणि अकाली दल ने भी विरोध किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा था कि पंजाब के 15वीं से 20वीं शताब्दी तक के इतिहास से जुड़े चार विषयों में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पंजाब के इतिहास को अकादमिक अध्ययन का महत्वपूर्ण और सम्मानित हिस्सा बनाए रखना जरूरी है।





