हरियाणा

Chandigarh: इंदिरा-देवीलाल विवाद को लेकर राजनीतिक घमासान

Admindelhi1
25 May 2026 11:27 AM IST
Chandigarh: इंदिरा-देवीलाल विवाद को लेकर राजनीतिक घमासान
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चंडीगढ़: इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के संयुक्त निदेशक रहे एमके धर द्वारा लिखी गई किताब ‘ओपन सीक्रेट’ से हरियाणा की राजनीति गरमा गई है। इस किताब में भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी तथा भूतपूर्व डिप्टी पीएम व हरियाणा के सीएम रहे चौ देवीलाल की मुलाकात का जिक्र किया गया है। इसके पीछे देवीलाल पुत्र और पूर्व मंत्री चौ रणजीत सिंह की भूमिका बताई गई है।

इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला ने इस किताब को मुद्दा बनाते हुए रणजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रणजीत सिंह, अभय चौटाला के चाचा हैं लेकिन राजनीतिक तौर पर दोनों के बीच काफी दूरियां हैं।

रविवार को यहां चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत में रणजीत सिंह ने न केवल अभय चौटाला को महम कांड के मुद्दे घेरा बल्कि एमके धर की पुस्तक पर भी गंभीर सवाल उठा दिए। रणजीत सिंह ने कहा कि 1987 के चुनावों में चौ देवीलाल के नाम की आंधी थी। इसी चुनाव में देवीलाल ने 90 में से 85 सीटों पर जीत हासिल की थी। इससे पहले चौ देवीलाल हरियाणा में न्याय युद्ध यात्रा पर थे और उनकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए ही एमके धर ने इंदिरा गांधी व देवीलाल की मुलाकात का जिक्र अपनी पुस्तक में किया है।

तथ्यों पर सवाल उठाते हुए रणजीत सिंह ने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई थी। ऐसे में मुलाकात का कोई औचित्य ही नहीं है। अभय चौटाला पर पलटवार करते हुए रणजीत सिंह ने कहा कि उन पर आरोप लगाने से पहले यह देखना चाहिए कि मैं (रणजीत सिंह) तो राजनीति में 1987 में ही आया। ओमप्रकाश चौटाला मेरे से पहले राजनीति में आ गए थे और महम कांड भी उनकी वजह से ही हुआ था।

विधायकों की खरीद-फरोख्त और हरियाणा में भजनलाल की मदद करने के आरोपों को खारिज करते हुए रणजीत सिंह ने कहा कि 1987 में 85 विधायकों के बाद पहली बार चौटाला को मुख्यमंत्री तब बनाया गया जब चौ देवीलाल उप प्रधानमंत्री बने। चौटाला ने महम से चुनाव लड़ा और वहां बड़ा कांड हुआ और 8 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद चौटाला को इस्तीफा देना पड़ा।

रणजीत सिंह ने कहा कि चौटाला ने अपने बेटे अजय सिंह चौटाला को भिवानी से लोकसभा चुनाव लड़ाया और पूरी इनेलो वहीं पर प्रचार में लग गई। अभय चौटाला द्वारा लगाए गए आरोपों पर रणजीत सिंह ने कहा कि मैंने राजनीति में कभी भी किसी के साथ समझौता नहीं किया। हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में समझौता किसने किया है, इसका पता पूरे प्रदेश की जनता को पिछले चुनावों में लग चुका है।

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