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Chandigarh: भीड़ और मॉब में अंतर समझकर पुलिस करें सतर्क

Admindelhi1
18 Oct 2025 5:43 PM IST
Chandigarh: भीड़ और मॉब में अंतर समझकर पुलिस करें सतर्क
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चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने प्रदेश के सभी पुलिस कर्मचारियों को भीड़ व मॉब के बीच का अंतर समझकर धरने-प्रदर्शनों से निपटने के निर्देश जारी किए हैं। पुलिस महानिदेशक ने राज्य के सभी पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा है कि अहिंसक धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रोष मार्च इत्यादि प्रजातंत्र की व्यवस्था हैं। लाठी-डंडा अंग्रेजों की भाषा थी। निरंकुश तंत्र था। शोषण में जुटे थे। लोगों के समूह को ख़तरनाक समझते थे। सबक़ सिखाने के लिए जलियांवाला बाग कांड तक कर गए।

डीजीपी ने कहा कि उन्होंने पुलिस अकादमी निदेशक को कहा है कि वह कर्मचारियों के लिए प्रोटेस्ट क्राउड मैनेजमेंट पर एक शॉर्ट-टर्म कोर्स डिज़ाइन करें। इससे आप सीख पायेंगे कि 'क्राउड' और 'मॉब' में क्या फर्क़़ है, कैसे एक उत्तेजित भीड़ को शांत किया जा सकता है।

वर्तमान परिवेश में पुलिस कर्मियों को क्राउड (भीड़) और मॉब (उपद्रवी भीड़) के बीच का अंतर समझना होगा। डीजीपी ने विधि-व्यवस्था के संचालन में लगे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को लिखा है कि भारत में बहु-पार्टी लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था है। स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधि सत्ता पक्ष और विपक्ष के रूप में जनता की जरूरतों और दिक्कतों को विभिन्न माध्यमों से प्रकट करते हैं। इन्हीं के आधार पर नीतियां बनती हैं और सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से जिले में तैनात अधिकारी इन नीतियों को लागू करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य हमेशा जन-कल्याण होता है।

युवा-बहुल्य भारत में बात-बात पर बल-प्रयोग कोई बुद्धि की बात नहीं है। ये हमारे नागरिक हैं। इन्हें नियम के अनुसार चलने के प्रेरित-प्रशिक्षित करना हमारा ही काम है। डीजीपी ने कहा है कि बेहतर होगा कि आप खेल-कूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नियमित ‘क्राउड-होस्टिंग’ करें। इससे आप युवाओं से जुड़ेंगे, उन्हें सही रास्ते चलने के लिए प्रेरित कर पायेंगे। इससे आपको भीड़ के संरचना और स्वभाव के बारे में भी फर्स्ट-हैंड पता चलता रहेगा। समाज में सकारात्मक प्रभाव रखने वाले लोगों से गठजोड़ बनेगा। व्यवस्था सुचारू रखने में सहायता मिलेगी। आपराधिक प्रवृत्ति के मतलब-परस्त लोग अपनी स्वार्थ-पूर्ति के लिए अक्सर इन प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। लोगों को बहकाकर तोड़ फोड़ और आगजऩी पर उतर आते हैं। कभी-कभी इनके तार दुश्मन देशों से भी जुड़े होते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों की पहचान करें। इनकी आपराधिक गतिविधियों को उजागर करें और इन्हें जेल से बाहर आने ही ना दें। डीजीपी ने पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि उनका काम विधि अनुसार व्यवस्था बनाये रखनी है ताकि गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा दूर करने और जन-कल्याण के अन्य कार्य में लगा तंत्र अपना काम निर्बाध करता रहे।

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