Chandigarh: बैंक घोटाला मामले में आईएएस अधिकारी और पूर्व अधीक्षक जेल भेजे गए

चंडीगढ़: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित घोटाले की जांच के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए गए हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह और विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व अधीक्षक प्रिंस शर्मा को सोमवार को पंचकूला स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
सीबीआई ने इस मामले में 18 जून को आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने उनके साथ विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व अधीक्षक प्रिंस शर्मा को भी हिरासत में लिया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दावा किया कि आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह ने गिरफ्तारी से पहले कथित बैंक धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड के साथ हुई अपनी चैटिंग डिलीट कर दी थी। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और कई पहलुओं की पड़ताल जारी है।
सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज प्राथमिकी को एजेंसी ने अपने हाथ में लिया था। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि 21 मई 2026 को 13 आरोपियों के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई थी। इसके बाद 12 जून को एक पूरक रिपोर्ट पेश कर विक्रम वाधवा और राजन सिंह को भी आरोपी बनाया गया। सीबीआई का कहना है कि अन्य विभागों और संदिग्ध व्यक्तियों की संभावित भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।
सीबीआई के मुताबिक, राम कुमार सिंह की कथित भूमिका उस दौरान सामने आई जब वे नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका में आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। वहीं, प्रिंस शर्मा की भूमिका विकास एवं पंचायत विभाग में उनकी तैनाती के दौरान सामने आने का दावा किया गया है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और आगे की जांच के आधार पर नए तथ्य सामने आ सकते हैं।





