हरियाणा

Chandigarh MC में BJP का करोड़ों का एजेंडा पास, विपक्ष ने जताई आपत्ति

Ratna Netam
2 May 2026 4:24 PM IST
Chandigarh MC में BJP का करोड़ों का एजेंडा पास, विपक्ष ने जताई आपत्ति
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Chandigarh.चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम (MC) के हालिया सत्र में बीजेपी ने विरोधी दलों की आपत्तियों के बावजूद करोड़ों रुपये के वित्तीय एजेंडा को पारित करवा लिया। विपक्ष ने इस कदम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी करार दिया और कहा कि नगर निगम में ऐसे महत्वपूर्ण मामलों पर बिना बहस के फैसला करना उचित नहीं है।
विपक्ष के नेताओं ने कहा कि नगर निगम के सदस्यों को एजेंडा पर अपनी राय व्यक्त करने और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए सुझाव देने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने सदन में बहुमत का
फायदा उठाते हुए
एजेंडा को बिना किसी गंभीर चर्चा के पास करवा लिया। इसके चलते नगर निगम में लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह उठ गया है।
बीजेपी के सदस्यों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से नियमों के अनुसार था। पार्टी का कहना है कि एजेंडा में शामिल धनराशि नगर निगम के पहले से स्वीकृत बजट और विकास कार्यों के लिए आवंटित की गई थी। इसलिए इसे लंबी बहस के बिना पारित करना आवश्यक था ताकि समय पर विकास योजनाएं लागू की जा सकें।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि पास किए गए एजेंडा में सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम सुधार, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये का आवंटन किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हों और जनता को उनका लाभ तुरंत मिल सके।
विपक्ष ने इस कदम को नगर निगम में लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि ऐसी प्रक्रियाएं जारी रहीं तो जनता का विश्वास स्थानीय प्रशासन पर से उठ सकता है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे उच्च अधिकारियों और राज्य प्रशासन से मामले की समीक्षा कराने का प्रयास करेंगे।
सदन के दौरान विपक्ष ने जोर देकर कहा कि नगर निगम में हर निर्णय में पारदर्शिता और चर्चा होना अनिवार्य है। उनका कहना था कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते सदस्य अपने वार्ड और क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं के बारे में चर्चा करने का अधिकार रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नगर निगम जैसे स्थानीय प्रशासनिक निकायों में अक्सर बहस को कम करके निर्णय लिया जाता है, लेकिन यह जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए चिंताजनक संकेत है। उनके अनुसार, खुली बहस और सभी सदस्यों की सहभागिता से ही नगर निगम की निर्णय प्रक्रिया मजबूत और प्रभावी बनती है।
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