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Haryana पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने रविवार को केंद्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकारों पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई जा रही है। चौटाला ने दावा किया कि हरियाणा में लगभग 34 लाख वोटरों (कुल वोटरों का करीब 15%) के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी-मोटी कमियों, जैसे सरनेम जोड़ने जैसी वजहों से नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों के वोटिंग अधिकार छिन सकते हैं।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह "वोट चोरी" के कथित मुद्दे को जनता तक पहुंचने से रोकने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा, "सरकार को डर है कि वोटर लिस्ट में हेरफेर की सच्चाई लोगों के सामने आ जाएगी।" उन्होंने चेतावनी दी कि वोटिंग अधिकार से वंचित करने से भविष्य में जरूरी सुविधाओं तक पहुंच पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
चौटाला ने आगे आरोप लगाया कि जायज मांगें उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा रहा है और युवा एक्टिविस्टों को उग्रवाद और विदेशी फंडिंग के आरोपों के जरिए बदनाम किया जा रहा है। लगभग 7,000 युवा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए करीब 25,000 पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी चिंताओं का समाधान ताकत के बजाय बातचीत से किया जाना चाहिए।
किसानों की चिंताओं को उठाते हुए जननायक जनता पार्टी के नेता ने कहा कि किसानों को अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की। सरकार में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए चौटाला ने कहा कि JJP ने गांवों में हजारों डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की योजना शुरू की थी ताकि छात्र स्थानीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। उन्होंने युवाओं के लिए नए मौके बनाने के बजाय इन सुविधाओं का नाम बदलकर 'अटल लाइब्रेरी' करने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि हरियाणा की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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